खेती पर संकट के बीच झारखंड का एक्शन प्लान, केंद्र से मांगी बड़ी मदद

खेती पर संकट के बीच झारखंड का एक्शन प्लान, केंद्र से मांगी बड़ी मदद

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jun 24, 2026, 11:33:00 AM

नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित राज्यों के कृषि मंत्रियों की समीक्षा बैठक में झारखंड ने कृषि क्षेत्र से जुड़ी कई अहम चुनौतियों को प्रमुखता से उठाया। राज्य का प्रतिनिधित्व कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने किया। उन्होंने संभावित टिड्डी हमले, उर्वरकों की उपलब्धता, जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव और किसानों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया।

बैठक में शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि झारखंड सरकार संभावित टिड्डी हमले की आशंका को गंभीरता से लेते हुए पहले ही तैयारी शुरू कर चुकी है। इसके लिए राज्य स्तर पर आपात कार्ययोजना तैयार की गई है और संवेदनशील जिलों की पहचान कर वहां आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की जा रही है। किसानों को समय रहते सतर्क करने के लिए जिला स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम और प्रशिक्षण आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें बदलते मौसम के अनुरूप खेती की आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर विशेष बल दिया जा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि यदि किसी क्षेत्र में टिड्डी हमला होता है तो प्रभावित किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज उपलब्ध कराया जाए।

जलवायु परिवर्तन के असर पर चर्चा करते हुए मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ऐसी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दे रही है, जो बदलते मौसम में भी किसानों की आय को सुरक्षित रखने में सहायक हों। इसी दिशा में किसानों को मक्का, दलहन और अन्य जलवायु-अनुकूल फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही पशुपालन, मत्स्य पालन, मशरूम उत्पादन, लाख उत्पादन और अन्य कृषि आधारित वैकल्पिक आजीविका गतिविधियों के विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि किसानों की आय के स्रोत विविध और मजबूत बन सकें।

समीक्षा बैठक के दौरान झारखंड को उर्वरकों की आपूर्ति का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने रखा गया। मंत्री ने बताया कि राज्य ने खेती के मौजूदा सीजन के लिए केंद्र से 3.90 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की मांग की थी, लेकिन स्वीकृति केवल 3.20 लाख मीट्रिक टन की मिली है। उन्होंने कहा कि कृषि कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए राज्य की वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया जाना जरूरी है।

मानसून की कमजोर शुरुआत को लेकर भी बैठक में चिंता व्यक्त की गई। भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 17 जून तक झारखंड में लगभग 74 मिमी वर्षा का अनुमान था, जबकि वास्तविक बारिश करीब 37 मिमी ही दर्ज की गई। इसके कारण राज्य में लगभग 40 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है और अधिकांश प्रखंड सामान्य से कम बारिश की स्थिति का सामना कर रहे हैं। हालांकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में वर्षा की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना जताई है, जिससे खरीफ सीजन की खेती को राहत मिलने की उम्मीद है।