केंद्र के आदेश की अनदेखी! ATR भेजने में फिसड्डी निकले 24 जिलों के पुलिस कप्तान

केंद्र के आदेश की अनदेखी! ATR भेजने में फिसड्डी निकले 24 जिलों के पुलिस कप्तान

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jun 23, 2026, 1:58:00 PM

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा उत्तर-पूर्वी राज्यों के नागरिकों के साथ होने वाले नस्लीय भेदभाव से जुड़े मामलों पर मांगी गई कार्रवाई रिपोर्ट (Action Taken Report) झारखंड से अब तक नहीं भेजी जा सकी है। इसकी वजह राज्य के सभी जिलों से आवश्यक जानकारी समय पर पुलिस मुख्यालय तक नहीं पहुंचना बताया जा रहा है। गंभीर विषय होने के बावजूद कई बार स्मरण पत्र जारी किए जाने के बाद भी जिला स्तर पर अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिलने से पुलिस मुख्यालय ने नाराजगी जताई है।

गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से यह जानकारी मांगी है कि उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लोगों के खिलाफ नस्लीय भेदभाव की घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। इसके तहत पुलिसकर्मियों को संवेदनशील बनाने, शिकायतों के त्वरित निस्तारण की व्यवस्था विकसित करने, जागरूकता कार्यक्रम चलाने और दर्ज मामलों में की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा मांगा गया है। साथ ही दिल्ली पुलिस द्वारा अपनाए गए मॉडल को अन्य राज्यों में भी लागू करने पर जोर दिया गया है।

इसी निर्देश के अनुपालन में झारखंड पुलिस मुख्यालय ने राज्य के सभी एसएसपी, एसपी और रेल एसपी को पत्र भेजकर सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुरूप विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा था। हालांकि निर्धारित समय सीमा तक किसी भी जिले से आवश्यक जानकारी प्राप्त नहीं हुई।

पुलिस मुख्यालय के अनुसार तीन जून तक राज्य के किसी भी जिले ने यह नहीं बताया कि स्थानीय स्तर पर नस्लीय भेदभाव रोकने के लिए कौन-कौन से उपाय किए गए हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम, शिकायत निवारण प्रणाली, पुलिस प्रशिक्षण मॉड्यूल, जागरूकता अभियान अथवा सुधारात्मक पहल जैसी सूचनाएं भी मुख्यालय को उपलब्ध नहीं कराई गईं।

स्थिति को गंभीर मानते हुए पुलिस मुख्यालय ने एक और पत्र जारी किया है। इसमें कहा गया है कि पांच बार रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद जिलों से रिपोर्ट नहीं मिलना चिंताजनक है। सभी जिलों को तत्काल यह जानकारी भेजने का निर्देश दिया गया है कि उनके क्षेत्र में उत्तर-पूर्वी राज्यों के किसी नागरिक के साथ नस्लीय भेदभाव की कोई घटना हुई है या नहीं, और यदि कोई मामला दर्ज हुआ है तो उस पर क्या कार्रवाई की गई।

यह पूरा मामला सर्वोच्च न्यायालय के 14 दिसंबर 2016 को दिए गए Karma Dorjee एवं अन्य बनाम Union of India मामले के फैसले से जुड़ा है। इस निर्णय के बाद उत्तर-पूर्वी राज्यों के लोगों के खिलाफ नस्लीय भेदभाव की शिकायतों की निगरानी के लिए एक मॉनिटरिंग कमेटी गठित की गई थी।

कमेटी की 15वीं बैठक 15 दिसंबर 2025 को आयोजित हुई थी। बैठक में उन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को दोबारा याद दिलाने की सिफारिश की गई थी जिन्होंने अब तक अपनी Action Taken Report उपलब्ध नहीं कराई है। इसी सिफारिश के आधार पर गृह मंत्रालय ने झारखंड सहित कई राज्यों से फिर से रिपोर्ट मांगी है।

गृह मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि कई राज्यों के पुलिस महानिदेशक स्तर से भी अब तक रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। ऐसे में सभी राज्यों से अपेक्षा की गई है कि वे दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली को अपनाते हुए संवेदनशीलता प्रशिक्षण, प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें।

झारखंड पुलिस मुख्यालय ने अब सभी जिलों को बिना विलंब आवश्यक रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है, ताकि राज्य की समेकित रिपोर्ट समय पर केंद्र सरकार को सौंपी जा सके। साथ ही संकेत दिए गए हैं कि लगातार लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ उच्च स्तर पर कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है।