झारखंड में सरकारी कोषागार से वेतन भुगतान के नाम पर सामने आए कथित फर्जीवाड़े को लेकर राज्य सरकार अब एक्शन मोड में आ गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मामले की जांच आपराधिक अन्वेषण विभाग (CID) को सौंपने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के बाद उन लोगों और अधिकारियों पर कार्रवाई तेज होने की उम्मीद है, जो सरकारी खजाने से अवैध निकासी में शामिल रहे हैं।
मुख्यमंत्री की स्वीकृति मिलते ही CID मुख्यालय ने जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, जल्द ही एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाएगा, जो वरिष्ठ अधिकारी के नेतृत्व में काम करेगा। यह टीम अलग-अलग जिलों में जाकर दस्तावेजों की गहन जांच करेगी और यह पता लगाएगी कि किस स्तर पर मिलीभगत के जरिए पैसे निकाले गए।
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि कई मामलों में ऐसे लोगों के नाम पर वेतन निकाला गया, जो पहले ही सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके थे। अभी तक बोकारो और हजारीबाग जिलों में अनियमितताओं की पुष्टि हुई है, लेकिन अधिकारियों को आशंका है कि यह गड़बड़ी अन्य जिलों में भी हो सकती है। इसलिए पूरे राज्य के सभी 24 जिलों के रिकॉर्ड खंगालने की तैयारी है।
सरकार इस मामले को केवल आपराधिक दृष्टिकोण से ही नहीं देख रही है, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर हुई चूक की भी जांच कराई जाएगी। इसके लिए किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, जो यह पता लगाएंगे कि सिस्टम में कहां-कहां खामियां रहीं। बताया जा रहा है कि वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश की थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने CID जांच को हरी झंडी दी।
इस पूरे प्रकरण का खुलासा तब हुआ जब हजारीबाग और बोकारो में ऑडिट और आंतरिक जांच के दौरान संदिग्ध लेन-देन सामने आए। जांच में पाया गया कि कुछ ऐसे खातों में वेतन का भुगतान किया जा रहा था, जिनके धारक वर्तमान में सरकारी सेवा में नहीं थे। हालांकि, अभी सभी जिलों से स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन CID जांच शुरू होने के बाद ट्रेजरी से जुड़े अधिकारियों में हलचल तेज हो गई है।