झारखंड को केंद्र से मिलेगी 687 करोड़ की मदद, ग्राम पंचायतों के लिये बड़ा फंड रिलीज

झारखंड को केंद्र से मिलेगी 687 करोड़ की मदद, ग्राम पंचायतों के लिये बड़ा फंड रिलीज

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Feb 28, 2026, 2:01:00 PM

केंद्र और राज्य के बीच वित्तीय सहयोग को लेकर अक्सर आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं। राज्य सरकार समय-समय पर यह मुद्दा उठाती रही है कि झारखंड को अपेक्षित केंद्रीय अंश नहीं मिलता। इसी पृष्ठभूमि में अब ग्रामीण विकास विभाग के पंचायती राज प्रभाग को केंद्र से महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है। भारत सरकार ने कुल 687 करोड़ रुपये जारी किए हैं, जिनमें 412 करोड़ रुपये बंधित (टाइड) मद में और करीब 275 करोड़ रुपये बेसिक (अनटाइड) अनुदान के रूप में शामिल हैं।

275 करोड़: स्थानीय जरूरतों के लिए अनटाइड फंड

वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने पंद्रहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी किस्त के रूप में 27512.53 लाख रुपये (लगभग 275.12 करोड़ रुपये) झारखंड को जारी किए हैं। यह राशि ग्रामीण स्थानीय निकायों (ग्राम पंचायत, प्रखंड पंचायत और जिला परिषद) को दी जाएगी।

यह “अनटाइड” अनुदान है, यानी पंचायतें इसे संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में वर्णित 29 विषयों के अंतर्गत अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार विकास कार्यों में खर्च कर सकती हैं। हालांकि, स्पष्ट किया गया है कि इस धनराशि का उपयोग वेतन या प्रशासनिक खर्चों के लिए नहीं होगा। केंद्र ने निर्देश दिया है कि राशि प्राप्ति के दस कार्यदिवस के भीतर बिना कटौती संबंधित निकायों को हस्तांतरित की जाए। देरी होने पर राज्य को ब्याज सहित भुगतान करना पड़ेगा।

412 करोड़: बुनियादी सेवाओं के लिए बंधित अनुदान

इसके अलावा 41268.79 लाख रुपये (करीब 412.68 करोड़ रुपये) की टाइड बेसिक ग्रांट भी स्वीकृत की गई है। यह वित्त वर्ष 2024-25 की पहली किस्त है। यह राशि राज्य की 4342 ग्राम पंचायतों, 253 प्रखंड पंचायतों और सभी 24 जिला परिषदों के लिए निर्धारित की गई है।

इस धन का उपयोग स्वच्छता, ओडीएफ की स्थिति बनाए रखने, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण जैसी अनिवार्य बुनियादी सेवाओं पर किया जाएगा।

केंद्र सरकार ने यहां भी स्पष्ट किया है कि निधि को दस कार्यदिवस के भीतर संबंधित निकायों तक पहुंचाना अनिवार्य होगा, अन्यथा विलंब पर ब्याज देय होगा।

कुल मिलाकर, यह राशि राज्य की ग्रामीण संरचना को मजबूत करने और स्थानीय निकायों की वित्तीय क्षमता बढ़ाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।