झारखंड के शिक्षकों को बड़ा झटका! सरकार ने ACP-MACP पर लगाई रोक

झारखंड के शिक्षकों को बड़ा झटका! सरकार ने ACP-MACP पर लगाई रोक

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jul 25, 2026, 11:49:00 AM

झारखंड सरकार ने राजकीयकृत प्रारंभिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (ACP) और मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (MACP) योजना के दायरे से बाहर रखने का निर्णय लिया है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इन शिक्षकों के लिए पहले से अलग पदोन्नति और वेतन उन्नयन की व्यवस्था प्रभावी है, इसलिए उन्हें अन्य सरकारी कर्मियों की तरह ACP और MACP का लाभ देने का कोई औचित्य नहीं बनता।

यह निर्णय झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश के बाद लिया गया। कुछ प्रारंभिक शिक्षकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए मांग की थी कि उन्हें भी अन्य सरकारी कर्मचारियों के समान समयबद्ध वित्तीय उन्नयन का लाभ दिया जाए। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पूरे विषय की समीक्षा कर निर्धारित समय सीमा में स्पष्ट निर्णय लेने का निर्देश दिया था।

अदालत के निर्देश के अनुपालन में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने प्राथमिक शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की। समिति में वित्त विभाग और विधि विभाग के अधिकारियों को भी शामिल किया गया। समिति ने शिक्षकों की सेवा शर्तों, पदोन्नति नियमों और वित्तीय प्रावधानों का विस्तृत परीक्षण किया।

समीक्षा के दौरान समिति इस निष्कर्ष पर पहुंची कि प्रारंभिक शिक्षकों के लिए पहले से ही अलग पदोन्नति प्रणाली लागू है, जिसके तहत निर्धारित सेवा अवधि पूरी करने पर क्रमिक पदोन्नति और उच्चतर वेतनमान का प्रावधान किया गया है। पहले यह व्यवस्था वर्ष 1993 की प्रोन्नति नियमावली के तहत संचालित थी, जबकि अब झारखंड राजकीयकृत प्रारंभिक विद्यालय शिक्षक प्रोन्नति नियमावली-2025 लागू है।

सरकार ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया है कि वित्त विभाग के नियमों के अनुसार जिन संवर्गों के कर्मचारियों के लिए अलग से पदोन्नति आधारित वित्तीय उन्नयन की व्यवस्था मौजूद होती है, उन्हें ACP या MACP योजना का लाभ नहीं दिया जाता। इसी आधार पर प्रारंभिक शिक्षकों को इन योजनाओं से बाहर रखने का निर्णय लिया गया है। वर्तमान नियमों में विभिन्न ग्रेडों में पदोन्नति के लिए न्यूनतम सेवा अवधि, शैक्षणिक योग्यता और अन्य निर्धारित पात्रताओं का पालन अनिवार्य किया गया है।

हालांकि सरकार के इस फैसले का झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संघ के प्रतिनिधि गंगा प्रसाद ने इसे शिक्षकों के हितों के प्रतिकूल बताते हुए कहा कि लंबे समय से प्रारंभिक शिक्षक ACP और MACP की मांग कर रहे थे, लेकिन सरकार ने उनकी अपेक्षाओं को नजरअंदाज कर दिया। उनका आरोप है कि समान जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद शिक्षकों के साथ अन्य सरकारी कर्मचारियों की तुलना में अलग व्यवहार किया जा रहा है।

शिक्षक संघ का कहना है कि बदलते शिक्षा तंत्र में शिक्षकों पर लगातार अतिरिक्त जिम्मेदारियां बढ़ रही हैं, ऐसे में उन्हें भी समुचित वित्तीय प्रोत्साहन मिलना चाहिए। संघ ने सरकार से आदेश पर पुनर्विचार की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन शुरू किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय तक भी ले जाया जाएगा।

सरकार के इस फैसले के बाद राज्यभर के हजारों प्रारंभिक शिक्षकों में असंतोष देखा जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि शिक्षक संगठन आगे क्या रणनीति अपनाते हैं और सरकार इस विरोध पर कोई नया रुख अपनाती है या नहीं।