झारखंड सचिवालय में स्टाफ की भारी कमी, फाइलों के निपटारे और विकास कार्यों पर पड़ रहा असर

झारखंड सचिवालय में स्टाफ की भारी कमी, फाइलों के निपटारे और विकास कार्यों पर पड़ रहा असर

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Mar 23, 2026, 10:29:00 AM

झारखंड सचिवालय सेवा में मानव संसाधन की कमी अब प्रशासनिक कामकाज पर स्पष्ट रूप से असर डालने लगी है। विभिन्न स्तरों पर बड़ी संख्या में पद खाली होने के कारण नीतिगत निर्णयों से लेकर विकास योजनाओं तक की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अवर सचिव स्तर पर स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। इस श्रेणी में कुल 328 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 120 अधिकारी ही कार्यरत हैं, जिससे 200 से अधिक पद खाली पड़े हैं। इस कमी का सीधा असर फाइलों के निष्पादन की गति पर पड़ रहा है।

इसी तरह सहायक प्रशाखा पदाधिकारी (एएसओ) के स्तर पर भी व्यापक रिक्तियां हैं। राज्य में इस पद के 1313 स्वीकृत पदों में से करीब 900 ही भरे जा सके हैं, जबकि 400 से अधिक पद अभी भी खाली हैं। निचले स्तर पर यह कमी कार्यप्रवाह को और अधिक बाधित कर रही है।

उच्च स्तर के पद भी इससे अछूते नहीं हैं। डिप्टी सेक्रेट्री के 54 स्वीकृत पदों में से आठ रिक्त हैं, जबकि ज्वाइंट सेक्रेट्री के 23 पदों में छह खाली पड़े हैं। सेक्शन ऑफिसर के पदों पर भी कमी दर्ज की गई है, जहां 657 स्वीकृत पदों के मुकाबले 640 अधिकारी ही तैनात हैं।

इन रिक्तियों के बीच एक और समस्या सामने आई है। सचिवालय सेवा से जुड़े कर्मचारी संगठनों ने आरोप लगाया है कि पदोन्नति मिलने के बावजूद कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां नहीं दी जा रही हैं और उन्हें पुराने या जूनियर पदों पर ही काम करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इन रिक्त पदों को नहीं भरा गया, तो प्रशासनिक कार्यों में देरी और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधाएं और बढ़ सकती हैं।