राज्य सरकार गंभीर मरीजों के इलाज को बेहतर और सुलभ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। योजना के तहत सभी मेडिकल कॉलेजों और जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पतालों में टेली-आईसीयू व्यवस्था विकसित की जाएगी। इस पहल को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने जिलों के सिविल सर्जनों, अस्पताल प्रभारियों और चिकित्सकों के साथ वर्चुअल बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि आवश्यक उपकरणों की खरीद और प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता जल्द सुनिश्चित की जाए।
वर्तमान में कुछ जिलों में इस सेवा की शुरुआत हो चुकी है। गुमला, सिमडेगा, चतरा और रांची के सदर अस्पताल टेली-आईसीयू नेटवर्क से जुड़े हैं, जहां रिम्स (RIMS) को मार्गदर्शक संस्थान की भूमिका दी गई है। यहां के सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से दूरस्थ रूप से गंभीर मरीजों की निगरानी कर उपचार संबंधी सलाह दे रहे हैं।
सरकार का लक्ष्य इस व्यवस्था को शीघ्र ही पूरे राज्य में विस्तार देना है, ताकि मरीजों को उच्चस्तरीय इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर न जाना पड़े। स्थानीय अस्पतालों में ही विशेषज्ञों की सलाह उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत डॉक्टरों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गई है। आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त पद भी सृजित किए जाएंगे, जबकि पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को आउटसोर्सिंग के माध्यम से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और अस्पतालों के रखरखाव पर भी विशेष ध्यान दिया गया। जिन संस्थानों में उपकरणों की खरीद प्रक्रिया लंबित है, उनकी निगरानी कड़ी करने और जरूरत पड़ने पर राज्य स्तर से सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई। साथ ही विभिन्न योजनाओं के तहत आवंटित बजट के उपयोग की समीक्षा करते हुए अधिकारियों ने अधिकांश जिलों में संतोषजनक खर्च पर संतोष जताया और शेष राशि को जल्द उपयोग में लाने के निर्देश दिए।
इस पहल से राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को तकनीकी मजबूती मिलने की उम्मीद है, जिससे गंभीर मरीजों को समय पर विशेषज्ञ परामर्श और बेहतर उपचार मिल सकेगा।