रांची स्थित पुलिस मुख्यालय के सभागार में बुधवार (11 फरवरी 2026) को DGsP/IGsP Conference 2025 के संदर्भ में राज्य स्तरीय डी-ब्रीफिंग और समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता संयुक्त रूप से वंदना दादेल (अपर मुख्य सचिव, गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग, झारखण्ड) और तदाशा मिश्र (पुलिस महानिदेशक, झारखण्ड) ने की।
इस बैठक में सम्मेलन के निष्कर्षों और पुलिस प्रशासन के आगामी रोडमैप को लेकर विस्तृत समीक्षा हुई। इसके बाद राज्यभर के पुलिस अधीक्षकों और संबंधित अधिकारियों के लिए कई अहम दिशा-निर्देश जारी किए गए।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि राज्य के सभी पुलिस अधीक्षक DGsP/IGsP Conference 2025 में तय किए गए प्रत्येक बिंदु का थाना स्तर तक शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करेंगे। इसके साथ ही नए आपराधिक कानून (न्याय संहिता) को पूरी तरह लागू करने के निर्देश भी दिए गए।
अधिकारियों ने पुलिसिंग के दृष्टिकोण में बदलाव की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि पुलिस अधीक्षक गिरफ्तारी-आधारित कार्रवाई के बजाय दोषसिद्धि-उन्मुख अनुसंधान और साक्ष्य आधारित जांच को प्राथमिकता दें।
बैठक में बीट पुलिसिंग और सामुदायिक पुलिसिंग को प्रभावी बनाने के लिए विशेष निर्देश दिए गए। साथ ही क्षेत्रीय, जिला और थाना स्तर पर नियमित सम्मेलन आयोजित कर नवीनतम परिणाम हासिल करने की रणनीति अपनाने को कहा गया।
नक्सल प्रभावित इलाकों में कानून-व्यवस्था के साथ-साथ कल्याणकारी गतिविधियों, युवाओं की भागीदारी, खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। बैठक में आत्मसमर्पण पुनर्वास नीति के शत-प्रतिशत क्रियान्वयन की अद्यतन स्थिति की समीक्षा भी की गई।
राज्य पुलिस को खुफिया सूचना संग्रह और अनुसंधान प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए NATGRID, NAFIS, CCTNS, ई-कोर्ट और AI-enabled analytics के प्रभावी इस्तेमाल के निर्देश दिए गए। इसके अलावा सभी अनुसंधानकर्ताओं को ई-साक्ष्य ऐप का अनिवार्य रूप से शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया।
बैठक में निर्देश दिया गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से पुलिस की उपलब्धियों और अच्छे कार्यों का नियमित प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि जनता में भरोसा बढ़े और पुलिस-जन संवाद मजबूत हो।
मादक पदार्थों के नेटवर्क, साइबर धोखाधड़ी और सोशल मीडिया के दुरुपयोग को लेकर आम जनता को जागरूक करने के लिए व्यापक प्रचार अभियान चलाने की बात कही गई। अफीम की खेती को रोकने के लिए Anti Drug Strategy की रूपरेखा तैयार कर इसके दुष्प्रभावों पर जन-जागरूकता अभियान शुरू करने का भी निर्देश दिया गया।
टूरिस्ट पॉलिसी के तहत पर्यटकों और पुलिस के बीच समन्वय स्थापित कर उनकी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की बात बैठक में प्रमुखता से उठाई गई।
भारत सरकार द्वारा निर्धारित I-Got पोर्टल पर अनुसंधानकर्ताओं के प्रशिक्षण की प्रगति का आकलन कर सभी को समय पर प्रशिक्षण पूरा कराने का निर्देश भी जारी किया गया।
बैठक में पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामलों और अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम से संबंधित केसों के क्रियान्वयन की अद्यतन स्थिति की भी समीक्षा की गई। साथ ही महिला सुरक्षा से जुड़े अपराधों के मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
इस राज्य स्तरीय बैठक में टी. कंदसामी (अपर पुलिस महानिदेशक, अभियान), क्रांति कुमार गड़िदेशी (पुलिस महानिरीक्षक, मानवाधिकार एवं DGsP/IGSP Conference Secretary), अखिलेश कुमार झा (निदेशक, झारखण्ड पुलिस अकादमी हजारीबाग), प्रभात कुमार (आईजी, विशेष शाखा), असीम विक्रांत मिंज, ए. विजयालक्ष्मी, सुदर्शन मंडल, अनुप बिरथरे, पटेल मयूर कनैयालाल सहित कई आईजी और डीआईजी उपस्थित रहे।
इसके अलावा अरविंद कुमार सिंह (एसपी, विशेष शाखा, रांची) और नाथु सिंह मीणा (एसपी, SIB) समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में राज्य के सभी प्रक्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक, क्षेत्रीय डीआईजी, वरीय पुलिस अधीक्षक और पुलिस अधीक्षक (JAPTC पदमा सहित) प्रत्यक्ष रूप से और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।