झारखंड में इको टूरिज्म के विस्तार को गति देने के लिए मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में झारखंड विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कक्ष में झारखंड इको टूरिज्म अथॉरिटी (JETA) की शासी निकाय की चौथी बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान राज्य में प्राकृतिक पर्यटन की संभावनाओं को व्यवस्थित ढंग से विकसित करने को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के उन क्षेत्रों की पहचान की जाए, जहां इको टूरिज्म को विकसित करने की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने वन, पर्यटन और जल संसाधन विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर एक समग्र और प्रभावी योजना तैयार करने पर जोर दिया, ताकि इन स्थलों का संतुलित और टिकाऊ विकास सुनिश्चित किया जा सके।
बैठक में मैथन, नेतरहाट, पतरातू, चाईबासा, दुमका और रांची सहित कई प्रमुख स्थानों पर इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के प्रस्तावों पर चर्चा की गई। साथ ही, मसानजोर की तर्ज पर पतरातू में भी पर्यटन सुविधाओं के विकास की संभावना पर विचार किया गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि चयनित स्थलों पर बुनियादी ढांचे का विकास तय समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए।
हेमन्त सोरेन ने कहा कि झारखंड अपनी प्राकृतिक संपदा और सौंदर्य के कारण देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में स्थान बना सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इको टूरिज्म का विकास न केवल राज्य को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाएगा, बल्कि इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से यह भी कहा कि धार्मिक स्थलों, जंगलों, नदियों, जलाशयों और पहाड़ी क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जाए, लेकिन इसके साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
इस बैठक में पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के मंत्री सुदिव्य कुमार, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, वन एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दीकी, जल संसाधन विभाग के सचिव प्रशांत कुमार, पर्यटन विभाग के सचिव मुकेश कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और Ecotourism Society of India के प्रतिनिधि मौजूद रहे।