बाल तस्करी के खिलाफ झारखंड पुलिस की बड़ी सफलता, कैलाश यादव ने की SIT और पुलिस नेतृत्व की सराहना

बाल तस्करी के खिलाफ झारखंड पुलिस की बड़ी सफलता, कैलाश यादव ने की SIT और पुलिस नेतृत्व की सराहना

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jan 19, 2026, 5:58:00 PM

धुर्वा में आज अंश-अंशिका बचाओ समिति के संयोजक एवं प्रदेश राजद प्रवक्ता कैलाश यादव ने बाल तस्करी के मामलों में उल्लेखनीय सफलता हासिल करने पर झारखंड पुलिस की कार्यप्रणाली की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि रांची पुलिस सहित पूरी झारखंड पुलिस टीम ने जिस सजगता और समर्पण के साथ बाल अपहरण और तस्करी से जुड़े आरोपियों को गिरफ्तार किया है, वह जनहित की सुरक्षा की दिशा में एक अनुकरणीय पहल है।

कैलाश यादव ने सबसे पहले राज्य के पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्रा को बधाई देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपहृत बच्चों की सकुशल वापसी सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने SIT का नेतृत्व कर रहे एडीजीपी मनोज कौशिक, रांची के सीनियर एसपी राकेश रंजन, ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर, सिटी एसपी पारस राणा, ट्रैफिक एसपी राकेश कुमार, डीएसपी, इंस्पेक्टरों और तकनीकी सेल के अधिकारियों के सामूहिक प्रयासों को अत्यंत प्रभावी और सफल बताया।

यादव ने कहा कि राज्य में बढ़ते अपराधों के बीच जिस सुनियोजित तरीके से बाल तस्करों के नेटवर्क की पहचान कर उसकी जड़ तक पुलिस पहुंची है, वह झारखंड पुलिस की पेशेवर क्षमता को दर्शाता है। अंश और अंशिका की तलाश के दौरान राज्यभर में चलाए गए विशेष अभियान के तहत बड़े पैमाने पर बच्चा चोरी से जुड़े अपराधियों पर कार्रवाई की गई, जो पुलिस इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

उन्होंने बताया कि रांची जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बीते दिनों दर्जनों अपहृत बच्चों को सकुशल बरामद किया गया है। इसी कड़ी में ओरमांझी से लापता कन्हैया कुमार की सुरक्षित वापसी को उन्होंने बेहद सुखद और राहत भरा बताया।

कैलाश यादव ने यह भी कहा कि हाल के दिनों में पुलिस प्रशासन ने टारगेटेड अभियानों के जरिए बाल अपहरण और तस्करी करने वाले गिरोहों के खिलाफ गंभीरता दिखाई है। यदि इसी प्रतिबद्धता और सक्रियता के साथ कार्रवाई जारी रही, तो राज्य से बच्चा चोर गिरोहों का पूरी तरह सफाया संभव है।

उन्होंने सामाजिक संदर्भ पर प्रकाश डालते हुए कहा कि झारखंड एक छोटा राज्य है, जहां अधिकांश आबादी मेहनतकश और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों की है। यहां के लोग भावनात्मक और आपसी मेलजोल वाले हैं, जिसका फायदा उठाकर बाहरी राज्यों के मानव और बाल तस्कर गिरोह सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे में प्रशासन को और अधिक सतर्क रहकर गहन जांच करने तथा अंतरराज्यीय गिरोहों का पर्दाफाश करने की आवश्यकता है।