झारखंड में पंचायत कानून की होगी व्यापक समीक्षा, सरकार ने बनाई उच्चस्तरीय समिति

झारखंड में पंचायत कानून की होगी व्यापक समीक्षा, सरकार ने बनाई उच्चस्तरीय समिति

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Apr 04, 2026, 1:31:00 PM

झारखंड सरकार ने राज्य की पंचायती व्यवस्था को अधिक सशक्त और समकालीन जरूरतों के अनुरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। पंचायती राज विभाग ने झारखंड पंचायती राज अधिनियम, 2001 की व्यापक समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है।

गठित समिति में प्रशासनिक अधिकारियों, विधि विशेषज्ञों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनुभवी लोगों को शामिल किया गया है। झारखंड हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश रत्नाकर भेंगरा को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में जोड़ा गया है। इसके अलावा पंचायत राज निदेशालय के निदेशक, पूर्व आईएएस अधिकारी विनोद किस्पोट्टा, जनजातीय कल्याण अनुसंधान संस्थान के उपनिदेशक, ग्रामीण विकास एवं विधि विभाग के नामित प्रतिनिधि भी इस समिति का हिस्सा हैं।

समिति में पेसा (PESA) क्षेत्रों से जुड़े दो उप विकास आयुक्तों को भी शामिल किया गया है, ताकि आदिवासी बहुल क्षेत्रों की जरूरतों और चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझा जा सके। साथ ही, सेवानिवृत्त जिला पंचायती राज पदाधिकारी प्रेमतोष चौबे, विभागीय सलाहकार सज्जाद मजीद और शैलेन्द्र कुमार सिंह, राज्य पेसा समन्वयक सुधीर कुमार पाल, वरिष्ठ अधिवक्ता रश्मि कात्यायन, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रामचन्द्र उरांव तथा सामाजिक कार्यकर्ता दयामनी बारला को भी सदस्य बनाया गया है।

सरकार ने इस समिति को तीन महीने के भीतर अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करने का लक्ष्य दिया है। समिति का मुख्य उद्देश्य वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप अधिनियम के प्रावधानों का मूल्यांकन करना और ग्राम सभाओं व त्रिस्तरीय पंचायत संस्थाओं के अधिकारों, भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को अधिक स्पष्ट एवं प्रभावी बनाने के उपाय सुझाना है।

इसके साथ ही समिति को खनिज संपदा, लघु वनोपज, भूमि अधिग्रहण और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण विषयों के संदर्भ में भी कानून की उपयोगिता का आकलन करना होगा। आवश्यक संशोधनों के लिए एक प्रारूप विधेयक तैयार करना भी इसकी जिम्मेदारी में शामिल है।

पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, समिति को निर्धारित समयसीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट और संशोधन प्रस्ताव सौंपने होंगे। इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि राज्य में पंचायत प्रणाली को अधिक अधिकार संपन्न और प्रभावी बनाया जा सकेगा, जिससे स्थानीय शासन को मजबूती मिलेगी।