झारखंड सरकार ने अवैध खनन और खनिजों के अनियमित कारोबार के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। खान विभाग द्वारा जारी हालिया आंकड़ों से साफ है कि राज्य में मेजर मिनरल के व्यापार को नियंत्रित करने और व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए बड़े स्तर पर निगरानी अभियान चलाया जा रहा है।
सरकारी कार्रवाई का असर राज्य के प्रमुख खनन क्षेत्रों में साफ दिखाई दे रहा है। रामगढ़, धनबाद, चतरा और लातेहार जैसे जिलों में नियमों का पालन नहीं करने वाले कारोबारियों पर विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। कई डीलरों के लाइसेंस अस्थायी रूप से निलंबित किए गए हैं, जबकि अनेक लाइसेंस स्थायी रूप से समाप्त कर दिए गए हैं।
धनबाद मंडल के अंतर्गत बोकारो, धनबाद और गिरिडीह जिले आते हैं। इस क्षेत्र में कुल 2686 खनिज डीलर पंजीकृत हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार 23 डीलरों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं, जिनमें सबसे अधिक मामले धनबाद जिले से जुड़े हैं। यहां अकेले 14 कारोबारियों पर कार्रवाई हुई है।
इसके अलावा 35 डीलरों के लाइसेंस समाप्त कर दिए गए हैं। विभाग का कहना है कि इनमें कई लाइसेंस की अवधि खत्म हो चुकी थी, जबकि कुछ मामलों में नियमों के उल्लंघन पाए गए। वर्तमान समय में इस मंडल में 1547 डीलर सक्रिय रूप से कारोबार कर रहे हैं।
हजारीबाग मंडल में चतरा, हजारीबाग, कोडरमा और रामगढ़ जिले शामिल हैं। इस क्षेत्र में भी विभाग ने व्यापक स्तर पर जांच और कार्रवाई की है।
रामगढ़ जिले में सबसे अधिक 3707 डीलर पंजीकृत हैं। इनमें से 1676 फिलहाल सक्रिय बताए गए हैं, जबकि 38 डीलरों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। वहीं 142 लाइसेंस समयसीमा समाप्त होने के कारण निष्क्रिय हो चुके हैं।
चतरा जिले में कार्रवाई का दायरा और बड़ा रहा। यहां 244 डीलरों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं, जो राज्य में किसी एक जिले में हुई सबसे बड़ी कार्रवाइयों में शामिल माना जा रहा है। पूरे हजारीबाग मंडल में वर्तमान में 277 डीलर निलंबन की कार्रवाई का सामना कर रहे हैं।
खनन विभाग का कहना है कि अवैध कारोबार और नियमों की अनदेखी पर आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि खनिज व्यापार को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जा सके।