झारखंड सरकार के वित्त विभाग ने राज्य की कोषागार प्रणाली को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से व्यापक प्रशासनिक बदलाव लागू किए हैं। लंबे समय से चली आ रही संरचनात्मक खामियों को दूर करने के लिए पदों के पुनर्संतुलन और पुनर्वितरण का निर्णय लिया गया है। इस कदम का असर राज्य के प्रमुख कोषागार केंद्रों; रांची, हजारीबाग, दुमका और चाईबासा पर स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा। विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिया है।
वित्त विभाग ने पूर्व में जारी एक संकल्प में हुई गंभीर टंकण त्रुटियों को स्वीकार करते हुए उन्हें दुरुस्त किया है। पहले कोषागार पदाधिकारियों की संख्या गलत तरीके से अधिक दर्ज हो गई थी, जिसे अब संशोधित कर वास्तविक संख्या के अनुरूप किया गया है। इसी तरह सहायक कोषागार पदाधिकारियों की संख्या में भी संशोधन करते हुए इसे बढ़ाया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि कुल स्वीकृत पदों की संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ है, बल्कि उन्हें अलग-अलग श्रेणियों में संतुलित तरीके से पुनर्वितरित किया गया है।
डिजिटल ढांचे को प्राथमिकता
नई व्यवस्था के तहत डिजिटल वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। एसएनए स्पर्श और साइबर ट्रेजरी जैसे आधुनिक प्लेटफॉर्म को सुदृढ़ करने के लिए अतिरिक्त कोषागार पदाधिकारी तैनात किए गए हैं। इसके लिए कुछ पारंपरिक कोषागारों से वरिष्ठ पदों को हटाकर इन नई इकाइयों में स्थानांतरित किया गया है।
हजारीबाग जैसे महत्वपूर्ण केंद्रों में कार्यभार को देखते हुए पदों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया गया है। पहले यहां सीमित संख्या में अधिकारी होने के कारण काम का दबाव अधिक था, लेकिन अब नई तैनाती से कार्यक्षमता में सुधार की उम्मीद है।
विभाग का मानना है कि कई प्रमंडलीय मुख्यालयों में पदों की संरचना जमीनी जरूरतों के अनुरूप नहीं थी। कुछ बड़े कोषागार ऐसे भी थे जहां आवश्यक स्तर के अधिकारी उपलब्ध नहीं थे। इस पुनर्गठन से न केवल वेतन वितरण और सरकारी भुगतानों की प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि प्रशासनिक निगरानी भी अधिक प्रभावी हो सकेगी।
मुख्य परिवर्तन क्या हैं
नए आदेश के तहत कई जिलों में वरिष्ठ कोषागार पदों को समाप्त कर उनकी जगह नियमित कोषागार पदाधिकारी के पद सृजित किए गए हैं। रांची से एक वरिष्ठ पद हटाकर हजारीबाग में स्थानांतरित किया गया है। दुमका, चाईबासा और पलामू जैसे जिलों में भी इसी तरह का पुनर्संयोजन किया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर कामकाज अधिक सुचारु हो सके।
इसके अलावा, पुराने दस्तावेजों में मौजूद त्रुटियों को भी सुधार दिया गया है, जिससे पदों की संख्या और संरचना अब स्पष्ट और सटीक हो गई है।
इस प्रशासनिक बदलाव को राज्य की वित्तीय प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तेज और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।