झारखंड में संवैधानिक संस्थाओं की नियुक्तियों पर हाई कोर्ट सख्त, सरकार को दी 6 हफ्ते की डेडलाइन

झारखंड में संवैधानिक संस्थाओं की नियुक्तियों पर हाई कोर्ट सख्त, सरकार को दी 6 हफ्ते की डेडलाइन

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Feb 10, 2026, 2:37:00 PM

झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य में वर्षों से खाली पड़े संवैधानिक पदों को लेकर सरकार पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकायुक्त, राज्य मानवाधिकार आयोग और सूचना आयोग जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं में पद रिक्त रहने से उनकी कार्यप्रणाली ठप पड़ती है और आम जनता के अधिकारों पर भी असर पड़ता है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया कि सभी लंबित नियुक्तियां छह सप्ताह के भीतर पूरी कर ली जाएंगी। हाई कोर्ट ने सरकार के इस बयान को रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया है और मामले की अगली सुनवाई की तारीख 17 मार्च 2026 तय कर दी है।

अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि तय समयसीमा के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो कोर्ट सख्त कदम उठा सकती है, जिससे सरकार पर दबाव और बढ़ सकता है।

जनहित याचिकाओं के बाद कोर्ट की सख्ती

यह पूरा मामला उन जनहित याचिकाओं से जुड़ा है, जिनमें आरोप लगाया गया था कि भ्रष्टाचार पर निगरानी रखने वाली लोकायुक्त जैसी संस्था समेत अन्य संवैधानिक निकाय लंबे समय से खाली पड़े हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि नियुक्तियों में देरी के कारण संस्थाएं प्रभावी रूप से काम नहीं कर पा रही हैं। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगते हुए समयसीमा तय करने का निर्देश दिया।

इसी दिन हाई कोर्ट में वकील महेश तिवारी से जुड़े अवमानना मामले की भी सुनवाई हुई। उल्लेखनीय है कि महेश तिवारी और जस्टिस राजेश कुमार के बीच पूर्व में हुई तीखी बहस के दौरान तिवारी ने टिप्पणी की थी “जज अपनी सीमा में रहें”। इसके बाद हाई कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने स्वतः संज्ञान लेते हुए उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू कर दी थी।

यह मामला बाद में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां CJI की पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए महेश तिवारी को हाई कोर्ट में बिना शर्त माफी मांगने की सलाह दी। इसके बाद आज सुनवाई में महेश तिवारी ने अदालत के समक्ष बिना शर्त माफी मांग ली। हाई कोर्ट ने माफी के बाद मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है।