1984 सिख दंगा पीड़ितों के मुआवजे पर झारखंड हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार को दो हफ्ते में रिपोर्ट देने का निर्देश

1984 सिख दंगा पीड़ितों के मुआवजे पर झारखंड हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार को दो हफ्ते में रिपोर्ट देने का निर्देश

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Mar 13, 2026, 12:39:00 PM

1984 के सिख विरोधी दंगों से प्रभावित लोगों को मुआवजा दिलाने और इससे जुड़े आपराधिक मामलों की निगरानी को लेकर दायर जनहित याचिका पर शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश एम. एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ के समक्ष राज्य सरकार ने मामले में प्रारंभिक स्थिति रिपोर्ट तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की। अदालत ने सरकार को दो सप्ताह का समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 30 मार्च तय की है।

दरअसल, सिख दंगा पीड़ितों को मुआवजा दिलाने के उद्देश्य से हाईकोर्ट के निर्देश पर एक सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। इस समिति का नेतृत्व सेवानिवृत्त न्यायाधीश डी. पी. सिंह कर रहे थे। लेकिन 8 मार्च को उनके निधन के बाद अब इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि अदालत या सरकार की ओर से नए आयोग के गठन का प्रस्ताव रखा जा सकता है, ताकि लंबित मामलों की जांच और निर्णय की प्रक्रिया जारी रह सके।

दस्तावेजों की कमी बड़ी चुनौती

हाईकोर्ट के पहले के आदेशों के बाद समिति की सिफारिश पर राज्य सरकार 41 पीड़ितों को मुआवजा प्रदान कर चुकी है। हालांकि, बाद में कुछ और लोगों ने खुद को दंगा प्रभावित बताते हुए अपने नाम जोड़े हैं। इन नए दावों की जांच और उनकी प्रामाणिकता की पुष्टि करने की जिम्मेदारी भी इसी समिति पर थी। कई मामलों में पीड़ितों के पास पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, जिससे दावों की पुष्टि करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार उन मामलों में मुआवजा देने से हिचक रही है, जहां दावों के समर्थन में पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए जा सके हैं। सरकार का कहना है कि उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों के अभाव में दावों की वैधता साबित करना मुश्किल है। फिलहाल सरकार अदालत में पेश करने के लिए अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर रही है।

इस मामले की अगली सुनवाई 30 मार्च को होगी, जहां अदालत राज्य सरकार की रिपोर्ट के आधार पर आगे की दिशा तय कर सकती है।