झारखंड में प्लेटफॉर्म श्रमिकों के अधिकारों को मिली वैधानिक मान्यता, राज्यपाल ने विधेयक को दो मंजूरी

झारखंड में प्लेटफॉर्म श्रमिकों के अधिकारों को मिली वैधानिक मान्यता, राज्यपाल ने विधेयक को दो मंजूरी

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Dec 18, 2025, 7:14:00 PM

तेज़ रफ्तार जीवन में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सेवाएं आम लोगों के लिए सुविधा का बड़ा जरिया बन चुकी हैं। मोबाइल पर एक क्लिक करते ही दवाइयों से लेकर रोज़मर्रा का सामान घर तक पहुंच रहा है। लेकिन इन सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले गिग श्रमिक लंबे समय से असुरक्षा, अनिश्चित आय और अधिकारों के अभाव से जूझते रहे हैं। अब झारखंड सरकार ने उनकी इस अनदेखी को दूर करने की दिशा में ठोस कदम उठाया है।

राज्य सरकार ने मानसून सत्र के दौरान झारखंड प्लेटफॉर्म आधारित गिग श्रमिक (निबंधन और कल्याण) विधेयक, 2025 को विधानसभा से पारित कराया था, जिसे अब राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार की मंजूरी भी मिल गई है। इसके साथ ही यह विधेयक कानून का रूप ले चुका है।

गिग श्रमिक कल्याण बोर्ड के गठन का रास्ता साफ

नए कानून के तहत राज्य में गिग श्रमिकों के लिए एक समर्पित कल्याण बोर्ड का गठन किया जाएगा। बोर्ड का मुख्यालय रांची में होगा और श्रम मंत्री इसके पदेन अध्यक्ष होंगे। बोर्ड में विभागीय सचिव सहित कुल छह सदस्य होंगे, जिनका कार्यकाल तीन वर्ष का रहेगा। इसी बोर्ड के माध्यम से गिग श्रमिकों और सेवा देने वाली कंपनियों (एग्रीगेटर्स) का पंजीकरण अनिवार्य रूप से किया जाएगा।

कानून का उल्लंघन करने वाले एग्रीगेटर्स पर सख्ती भी तय की गई है। गंभीर मामलों में उन पर अधिकतम 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

न्यूनतम पारिश्रमिक और सामाजिक सुरक्षा का प्रावधान

अब गिग श्रमिकों को उनके काम के समय और तय दूरी के आधार पर न्यूनतम पारिश्रमिक देने का प्रावधान होगा। सामाजिक सुरक्षा को लेकर समय-समय पर योजनाएं बनाई जाएंगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि कल्याण अंशदान का बोझ न तो सीधे और न ही परोक्ष रूप से उपभोक्ताओं या श्रमिकों पर डाला जाएगा।

एग्रीगेटर्स से राज्य में अर्जित वार्षिक टर्नओवर के आधार पर अधिकतम 2 प्रतिशत या न्यूनतम 1 प्रतिशत तक का कल्याण अंशदान लिया जाएगा। सभी प्लेटफॉर्म कंपनियों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।

गिग श्रमिकों को मिलेंगे स्पष्ट अधिकार

पंजीकरण के बाद गिग श्रमिकों को एक विशेष पहचान पत्र (आईडी) प्रदान किया जाएगा। वे न्यूनतम पारिश्रमिक के हकदार होंगे और सुरक्षित कार्य परिस्थितियों में काम करने का अधिकार मिलेगा। काम से जुड़ी शर्तों या किसी विवाद की स्थिति में वे कल्याण बोर्ड से सलाह ले सकेंगे। इसके अलावा, उन्हें कम से कम साप्ताहिक आधार पर भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।

उल्लंघन पर सख्त दंड का प्रावधान

कानून का पालन नहीं करने पर एग्रीगेटर्स पर पहले चरण में 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यदि दोषसिद्ध होने के बाद भी नियमों का उल्लंघन जारी रहा, तो सुधार होने तक प्रतिदिन 5 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना वसूला जाएगा। किसी आपराधिक कृत्य की स्थिति में कंपनी के निदेशक, प्रबंधक, कंपनी सचिव या संबंधित अधिकारी के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।

इस कानून के लागू होने से झारखंड देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है, जहां गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को संगठित ढांचे में अधिकार और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में ठोस पहल की गई है।