झारखंड विधानसभा में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने ‘जोहार’ के साथ वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट भाषण शुरू किया। उन्होंने सदन से बजट पेश करने की अनुमति के लिए आभार जताते हुए कहा कि अपने संसदीय जीवन में यह दूसरा अवसर है जब वे राज्य की अनुमानित आय-व्यय विवरणी प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने सदन, राज्य की जनता, अपनी पार्टी नेतृत्व और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति धन्यवाद प्रकट किया।
भाषण के दौरान मंत्री ने कहा कि राज्य एक बड़े सामाजिक-राजनीतिक व्यक्तित्व की कमी महसूस कर रहा है: दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन। बजट प्रस्तुति के अवसर पर उन्होंने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो, तेलंगा खड़िया, ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव, पांडेय गणपत राय, नीलांबर-पीतांबर और शेख भिखारी सहित अनेक ज्ञात-अज्ञात शहीदों को नमन किया।
मंत्री ने झारखंड की प्राकृतिक संपदा और सांस्कृतिक धरोहर का उल्लेख करते हुए नेतरहाट, बेतला राष्ट्रीय उद्यान, हजारीबाग अभयारण्य, बाबा बैद्यनाथ धाम, रजरप्पा, पलामू किला, पारसनाथ, राजमहल की जामा मस्जिद, रांची का जीईएल चर्च, साहेबगंज का गुरुद्वारा और विभिन्न बांधों का जिक्र किया।
वित्त मंत्री ने कहा कि बजट महज आय-व्यय का दस्तावेज नहीं, बल्कि राज्य की भावी दिशा तय करने वाला रोडमैप है। उनके अनुसार यह बजट समावेशी, सतत और जनहितकारी विकास के लिए समर्पित है, जो आर्थिक मजबूती और सामाजिक न्याय के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार राज्य गठन के मूल उद्देश्यों, क्षेत्रीय असमानता दूर करने, आदिवासी हितों की रक्षा और संसाधनों के न्यायसंगत उपयोग को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रही है। ‘अबुआ सरकार’ और ‘अबुआ राज’ की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए बजट को जनभागीदारी के जरिए तैयार किया गया है। वर्ष 2026-27 में “अबुआ दिशोम बजट” गोष्ठियों और परिचर्चाओं के माध्यम से इसे बहुआयामी स्वरूप दिया गया।
भाषण में केंद्र सरकार से वित्तीय सहयोग का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। मंत्री ने कहा कि केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी के तहत लगभग 5,000 करोड़ रुपये अभी प्राप्त नहीं हुए हैं। अनुदान मद में करीब 11,000 करोड़ रुपये लंबित हैं। इसके अलावा कोल कंपनियों पर 1.36 लाख करोड़ रुपये बकाया होने का भी उल्लेख किया गया।
सीमित संसाधनों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि केवल राज्यांश और केंद्रांश से आधारभूत संरचना का विस्तार संभव नहीं है। इसलिए राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ PPP मॉडल, CSR और बाहरी एजेंसियों से वित्तीय संसाधन जुटाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
राज्य गठन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर झारखंड सरकार ने पहली बार दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2026 में भागीदारी की, जिसे मंत्री ने राज्य की वैश्विक पहचान मजबूत करने की दिशा में अहम कदम बताया।
बहुप्रतीक्षित PESA अधिनियम को 2 जनवरी 2026 से लागू करने की घोषणा की गई। इसके तहत ग्राम सभाओं को बालू घाट प्रबंधन, लाभुक चयन और हाट-बाजार संचालन जैसे अधिकार दिए गए हैं। राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा पर 2024-25 और 2025-26 में स्थानीय निकायों के लिए 1172.66 करोड़ रुपये अनुदान तय किए गए हैं।
सरकार की प्राथमिकताओं में किसानों को कर्ज से राहत और आय वृद्धि शामिल है। कृषि क्षेत्र में रोजगार दर बढ़कर 50.4 प्रतिशत पहुंचने की जानकारी दी गई।
शिक्षा के क्षेत्र में धनबाद में दो तथा पलामू, लातेहार और गढ़वा में एक-एक झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय स्थापित किए जाएंगे। 100 नए उत्कृष्ट विद्यालय (CM School of Excellence) खोलने का लक्ष्य है। शहीदों के आश्रितों के लिए आदर्श विद्यालय की स्थापना भी प्रस्तावित है।
महिला किसानों के लिए “महिला किसान खुशहाली योजना” शुरू की गई है, जिसके लिए 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अगले वित्तीय वर्ष में केंद्रांश मद में लगभग 18,273 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है।
अंतिम पंक्ति के लोगों को मुख्यधारा में लाने के उद्देश्य से झारखंड सर्वजन पेंशन योजना, मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना, मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना और कृषि ऋण माफी योजना को आगे बढ़ाने की बात कही गई।
वित्त मंत्री ने अपने भाषण में स्पष्ट किया कि यह बजट झारखंड को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक व्यापक खाका है, जिसमें सामाजिक न्याय, आदिवासी अस्मिता और समावेशी विकास को केंद्र में रखा गया है।