राज्य के प्रशिक्षण संस्थानों में कॉमन्स और इको-रिस्टोरेशन पर अध्ययन, अधिकार-आधारित पाठ्यक्रम की जरूरत रेखांकित

राज्य के प्रशिक्षण संस्थानों में कॉमन्स और इको-रिस्टोरेशन पर अध्ययन, अधिकार-आधारित पाठ्यक्रम की जरूरत रेखांकित

Partnering Hope Into Action Foundation (PHIA) ने झारखंड के प्रमुख प्रशिक्षण संस्थानों में कॉमन्स और पारिस्थितिक पुनर्स्थापन को लेकर किए गए अपने स्कोपिंग अध्ययन के निष्कर्ष शुक्रवार को सार्वजनिक किए। अध्ययन के विमोचन और प्रसार से जुड़ा कार्यक्रम राज्य ग्रामीण विकास संस्थान (SIRD), साउथ कैंपस, रांची में आयोजित हुआ।

अध्ययन में यह तथ्य सामने आया कि SIRD, सेंट्रल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (CTI) और फॉरेस्ट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (FTI) जैसे संस्थान प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के कुछ पहलुओं पर प्रशिक्षण तो प्रदान करते हैं, लेकिन कॉमन्स, पारिस्थितिक पुनर्स्थापन और वन अधिकार अधिनियम (FRA) जैसे अहम विषय अब तक पाठ्यक्रमों में व्यवस्थित और समग्र रूप से शामिल नहीं हो पाए हैं।

रिपोर्ट में योजना-आधारित प्रशिक्षण मॉडल से आगे बढ़ते हुए अधिकार-केंद्रित और शासन आधारित ढांचे को अपनाने की आवश्यकता बताई गई है। इसमें ग्राम सभाओं की निर्णायक भूमिका को मजबूत करने, FRA के प्रभावी क्रियान्वयन, सामुदायिक संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा देने तथा पंचायती राज संस्थाओं, वन प्रशासन और जलवायु कार्रवाई के बीच बेहतर तालमेल की सिफारिश की गई है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक रवि रंजन ने कहा कि झारखंड के वन और जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रशिक्षण प्रणालियों में कॉमन्स और पारिस्थितिक पुनर्स्थापन को शामिल करना अब अपरिहार्य हो गया है। वहीं सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा अधिकारी अजय कुमार रस्तोगी ने इसे झारखंड में न्यायसंगत संक्रमण (जस्ट ट्रांजिशन) से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विमर्श बताया।

गौरतलब है कि यह अध्ययन और संवाद कार्यक्रम PHIA फाउंडेशन की ‘कॉमन ग्राउंड’ पहल के तहत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य झारखंड में कॉमन्स से जुड़ी सामूहिक पहलों को पुनर्जीवित करना और उन्हें नीति व प्रशिक्षण प्रक्रियाओं से जोड़ना है।