झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) की नई नियमावली को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र तिवारी ने राज्य सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया है कि परीक्षा की प्रक्रिया और नियम तय करने में सरकार पूरी तरह नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि इस पूरी व्यवस्था से युवाओं को भ्रमित किया गया है और उनके भविष्य के साथ अन्याय किया जा रहा है। तिवारी ने विशेष रूप से भाषा के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि राज्य के कई इलाकों में प्रचलित क्षेत्रीय भाषाओं को दरकिनार किया जा रहा है। उनके मुताबिक, कुछ भाषाओं को जबरन प्राथमिकता देकर अन्य भाषाओं को बाहर करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह स्थानीय पहचान और सांस्कृतिक विविधता के खिलाफ भी है। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड के कई जिलों, जैसे पलामू, गढ़वा, लातेहार, चतरा, हजारीबाग और साहिबगंज में भोजपुरी, मैथिली, मगही और अंगिका का व्यापक इस्तेमाल होता है। इसके बावजूद इन भाषाओं को जेटेट की नई नियमावली में जगह नहीं दी गई, जिससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। जेडीयू नेता ने जोर देते हुए कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक पहचान और विरासत की आधारशिला होती है। ऐसे में इन भाषाओं की अनदेखी करना स्थानीय छात्रों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है। उन्होंने राज्य सरकार से तत्काल नियमावली में बदलाव कर इन भाषाओं को शामिल करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो 10 अप्रैल से व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।