असम-बंगाल चुनाव पर JMM की नजर? CM हेमंत सोरेन के बयान से तेज हुई राजनीतिक चर्चा

असम-बंगाल चुनाव पर JMM की नजर? CM हेमंत सोरेन के बयान से तेज हुई राजनीतिक चर्चा

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Feb 04, 2026, 2:51:00 PM

झारखंड में गठबंधन की राजनीति के जरिए लगातार दो बार सत्ता में वापसी कर चुकी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) अब राज्य की सीमाओं से बाहर भी अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाती नजर आ रही है। इसी बीच, इस साल होने वाले असम और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं कि JMM इन दोनों राज्यों में भी अपनी भूमिका तलाश सकती है।

हालांकि पार्टी की ओर से अब तक किसी तरह की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की हालिया गतिविधियां और बयान इस संभावना को और मजबूत कर रहे हैं।

दुमका एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में दिए संकेत

मंगलवार को रांची रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दुमका एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत की। इसी दौरान उनसे सवाल किया गया कि क्या JMM असम और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।

इस पर मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कोई अंतिम निर्णय नहीं बताया, लेकिन संकेत देते हुए कहा कि यह फैसला आने वाले दिनों में पार्टी स्तर पर लिया जाएगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि JMM हमेशा आदिवासी अधिकारों की लड़ाई लड़ती रही है और आगे भी इसी दिशा में काम करती रहेगी।

‘ग्रेटर झारखंड’ के सपने का जिक्र

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस दौरान पार्टी संस्थापक शिबू सोरेन का उल्लेख करते हुए कहा कि “गुरुजी” का ग्रेटर झारखंड का सपना जरूर पूरा होगा। उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन लंबे समय से उन इलाकों के आदिवासी समुदायों से जुड़े रहे हैं, जहां उनकी बड़ी आबादी मौजूद है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले आदिवासी समाज के लोग JMM को अच्छी तरह जानते हैं और पार्टी पर भरोसा करते हैं।

असम के आदिवासी समुदाय को लेकर बड़ी बात

हेमंत सोरेन ने असम का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां आदिवासी समुदाय की संख्या काफी अधिक है। उन्होंने चाय उद्योग का जिक्र करते हुए कहा कि यह इंडस्ट्री बड़ी हद तक आदिवासी श्रमिकों पर निर्भर है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछले 100 से 150 वर्षों में कई आदिवासी परिवार रोजगार के कारण अलग-अलग राज्यों में जाकर बस गए हैं, लेकिन आज भी वे अपनी पहचान और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जहां-जहां आदिवासी समाज मौजूद है, वहां JMM को एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में देखा जाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि पार्टी आदिवासियों की आवाज को बुलंद करने का माध्यम बन सकती है, तो इसमें कोई नुकसान नहीं है।

बिहार चुनाव का अनुभव और बंगाल में TMC की रणनीति

हालांकि JMM झारखंड के बाहर विस्तार की योजना बना रही है, लेकिन हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी। इससे बिहार में JMM की चुनावी मौजूदगी प्रभावी नहीं बन पाई।

दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी पहले ही यह ऐलान कर चुकी हैं कि उनकी पार्टी राज्य में अकेले चुनाव लड़ेगी। ऐसे में बंगाल में JMM के लिए राजनीतिक समीकरण और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

अब राजनीतिक नजरें इस बात पर टिकी हैं कि JMM असम और पश्चिम बंगाल में वास्तव में चुनावी मैदान में उतरती है या फिलहाल केवल संगठन विस्तार तक ही सीमित रहती है।