रांची विश्वविद्यालय में ‘हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर’ का उद्घाटन, राज्यपाल बोले-समग्र स्वास्थ्य ही सफलता की कुंजी

रांची विश्वविद्यालय में ‘हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर’ का उद्घाटन, राज्यपाल बोले-समग्र स्वास्थ्य ही सफलता की कुंजी

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Apr 08, 2026, 1:57:00 PM

झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने रांची विश्वविद्यालय परिसर स्थित मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर में स्थापित ‘हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह केंद्र विश्वविद्यालय से जुड़े विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के बहुआयामी स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने इस पहल के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की सराहना की।

अपने संबोधन में राज्यपाल ने वर्तमान दौर की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि केवल पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने युवाओं को संतुलित जीवनशैली अपनाने, सकारात्मक सोच विकसित करने और नियमित रूप से योग, ध्यान व व्यायाम करने की सलाह दी। उनके अनुसार, अनुशासन, आत्मविश्वास और एकाग्रता जीवन में सफलता पाने के मूल तत्व हैं।

मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि तनाव और चिंता जैसी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। समय पर विशेषज्ञों की मदद लेना और समाज में संवाद व संवेदनशीलता को बढ़ावा देना बेहद आवश्यक है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह केंद्र विश्वविद्यालय समुदाय को मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही, रिम्स और सीआईपी जैसे संस्थानों के सहयोग से यहां बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

राज्यपाल ने यह भी कहा कि देश ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर अग्रसर है और ‘फिट इंडिया’ व ‘आयुष्मान भारत’ जैसे कार्यक्रम युवाओं के समग्र विकास को प्रोत्साहित कर रहे हैं। उन्होंने इस केंद्र को शिक्षा और स्वास्थ्य के समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया और उम्मीद जताई कि यह अन्य संस्थानों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।

इस मौके पर राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव डॉ. नितिन कुलकर्णी ने कहा कि आज मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर सामाजिक मुद्दा बन चुका है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे इस केंद्र का लाभ उठाएं और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों से सलाह लेने में संकोच न करें। उन्होंने चिंता जताई कि देश में आत्महत्या के मामलों में युवाओं की संख्या अधिक है, जो समय पर परामर्श की आवश्यकता को दर्शाता है।

डॉ. कुलकर्णी ने यह भी सुझाव दिया कि केंद्र का संचालन नियमित और प्रभावी ढंग से होना चाहिए तथा यहां काउंसलरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने टेली-काउंसलिंग सेवाओं को विकसित करने पर भी जोर दिया, ताकि अधिक से अधिक लोग इस सुविधा तक पहुंच सकें। साथ ही, उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक का उपयोग कर स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना समय की मांग है, जिससे समाज के व्यापक वर्ग को इसका लाभ मिल सके।