रिम्स की 7 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा, हाईकोर्ट की सख्ती के बाद ACB जांच शुरू

रिम्स की 7 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा, हाईकोर्ट की सख्ती के बाद ACB जांच शुरू

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jan 06, 2026, 10:32:00 AM

रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) की जमीन पर वर्षों से चले आ रहे अवैध कब्जे और निर्माण के मामले में अब जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। झारखंड हाईकोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद झारखंड एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने सोमवार को रांची शाखा में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर औपचारिक जांच शुरू कर दी है।

यह कार्रवाई हाईकोर्ट की खंडपीठ—मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजेश शंकर—के आदेश के अनुपालन में की गई है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि रिम्स की जमीन पर हुए अतिक्रमण सिर्फ जमीन कब्जाने का मामला नहीं हैं, बल्कि इसमें सरकारी तंत्र के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका भी गंभीर है। इसी आधार पर एसीबी को जांच सौंपी गई।

दोषियों से होगी मुआवजे की वसूली
हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया जारी रखने के साथ यह भी निर्देश दिया है कि जिन लोगों के अवैध मकान या निर्माण ध्वस्त किए जा रहे हैं, उन्हें मुआवजा दिया जाएगा। हालांकि, यह राशि सरकारी खजाने से नहीं, बल्कि उन अधिकारियों और बिल्डरों से वसूली जाएगी, जिनकी भूमिका अवैध निर्माण को बढ़ावा देने में सामने आएगी।

किन अधिकारियों पर रहेगी नजर
अदालत के आदेश के अनुसार, एसीबी की जांच उन सभी सरकारी कर्मियों तक पहुंचेगी जिन्होंने राजस्व अभिलेखों में गड़बड़ी कर सरकारी जमीन पर निजी नाम दर्ज कराए, अवैध निर्माण के लिए किराया रसीदें या ऋण मुक्ति प्रमाणपत्र जारी किए, या फिर नियमों को दरकिनार कर भवन नक्शों को स्वीकृति दी। जांच में यह भी देखा जाएगा कि किन परिस्थितियों में सरकारी भूमि पर बहुमंजिला अपार्टमेंट तक खड़े हो गए।

सात एकड़ से अधिक भूमि पर अतिक्रमण
पूरा विवाद रिम्स की उस जमीन से जुड़ा है, जो वर्ष 1964–65 में अधिग्रहीत की गई थी और जिसका रकबा सात एकड़ से अधिक बताया गया है। झारखंड विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि इस भूमि पर मंदिर, दुकानें, पार्क और बहुमंजिला आवासीय इमारतें बना दी गईं, जिनमें फ्लैट्स की बिक्री भी हुई।

रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को 72 घंटे के भीतर अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया था। इसके बाद से रांची जिला प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटाओ अभियान तेज कर दिया गया है, और अब एसीबी की जांच ने इस पूरे मामले को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है।