सरकारी हेलीकॉप्टर पर सदन में बहस, महंगे किराये पर विपक्ष का सवाल

सरकारी हेलीकॉप्टर पर सदन में बहस, महंगे किराये पर विपक्ष का सवाल

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Mar 14, 2026, 12:55:00 PM

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सरकारी कामकाज में इस्तेमाल होने वाले हेलीकॉप्टर और चार्टर विमानों को लेकर सदन में तीखी चर्चा देखने को मिली. विपक्षी विधायकों ने निजी कंपनियों को किए जा रहे भारी भुगतान पर सवाल उठाते हुए सरकार से अपना हेलीकॉप्टर या विमान खरीदने की पहल करने की मांग की. वहीं सरकार ने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में निजी एजेंसियों से सेवाएं लेना ही अधिक व्यावहारिक और आर्थिक रूप से उचित है.

बहस की शुरुआत करते हुए विधायक शशि भूषण मेहता ने कहा कि राज्य सरकार फिलहाल निजी एजेंसियों के जरिए हेलीकॉप्टर और चार्टर विमान किराए पर लेती है, जिस पर हर साल भारी रकम खर्च होती है. उनका आरोप था कि इस व्यवस्था के कारण सरकारी धन का अनावश्यक खर्च हो रहा है. उन्होंने सरकार से स्पष्ट रूप से पूछा कि क्या भविष्य में राज्य अपना हेलीकॉप्टर खरीदने की योजना बना रहा है, ताकि जनता के पैसों की बचत हो सके.

लातेहार हादसे का मुद्दा भी उठा

चर्चा के दौरान मेहता ने लातेहार में हुए एक हेलीकॉप्टर हादसे का जिक्र करते हुए सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि निजी कंपनी के हेलीकॉप्टर से जुड़े उस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई थी, लेकिन अब तक किसी की जिम्मेदारी तय नहीं हो सकी. उनके मुताबिक, अगर हेलीकॉप्टर सरकारी होता तो जवाबदेही तय करना आसान होता. उन्होंने यह भी कहा कि मृतकों के परिजनों को कम से कम पांच करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

इस पर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि चतरा क्षेत्र से जुड़ी यह घटना बेहद दुखद थी. उन्होंने जानकारी दी कि संबंधित कंपनी को फिलहाल सेवाओं से अलग कर दिया गया है और पूरे मामले की जांच नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा की जा रही है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिलाने के लिए सरकार प्रयास कर रही है.

खरीद के बजाय किराए को बताया बेहतर विकल्प

विधायक नवीन जायसवाल ने भी सरकार से यह जानकारी मांगी कि एक वित्तीय वर्ष में चार्टर विमानों पर कुल कितना खर्च किया जाता है और यदि खरीद की योजना है तो उसमें देरी क्यों हो रही है.

इस पर मंत्री दीपक बिरुआ ने जवाब देते हुए कहा कि फिलहाल राज्य सरकार का अपना हेलीकॉप्टर खरीदने का कोई प्रस्ताव नहीं है. उन्होंने बताया कि नए हेलीकॉप्टर की कीमत लगभग 80 से 100 करोड़ रुपये तक होती है. इसके अलावा रखरखाव, पायलटों की नियुक्ति, तकनीकी स्टाफ और संचालन से जुड़े अन्य खर्च भी काफी अधिक होते हैं, जिससे यह व्यवस्था महंगी और जटिल बन जाती है.

बिरुआ ने यह भी कहा कि कई अन्य राज्य जैसे बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और ओडिशा भी अपनी आवश्यकताओं के लिए निजी एजेंसियों से ही हेलीकॉप्टर सेवाएं लेते हैं.

सत्ता पक्ष को विपक्ष से भी मिला समर्थन

बहस के दौरान एक दिलचस्प स्थिति तब बनी जब भाजपा के वरिष्ठ नेता सीपी सिंह ने सरकार के तर्कों का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि तकनीकी और आर्थिक दृष्टि से अपना विमान या हेलीकॉप्टर खरीदना अक्सर लाभदायक साबित नहीं होता. उनके मुताबिक, जरूरत के अनुसार किराए पर सेवाएं लेना ही अधिक व्यावहारिक और सुविधाजनक व्यवस्था है.

इस मुद्दे पर हुई चर्चा के बाद सदन में यह स्पष्ट हुआ कि फिलहाल सरकार निजी एजेंसियों के जरिए ही हेलीकॉप्टर और चार्टर विमान सेवाएं लेने की व्यवस्था को जारी रखने के पक्ष में है, जबकि विपक्ष भविष्य में इस नीति की समीक्षा की मांग कर रहा है.