रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा (होटवार जेल) में एक महिला बंदी के कथित यौन शोषण से जुड़े मामले की सुनवाई सोमवार को झारखंड हाई कोर्ट में हुई। सुनवाई के दौरान मामले से संबंधित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए, जिन पर कोर्ट ने विस्तार से विचार किया।
कार्यवाही के दौरान महिला बंदी का लिखित बयान अदालत में रखा गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अपने बयान में महिला ने यौन शोषण के आरोपों का समर्थन नहीं किया है और ऐसी किसी घटना से इनकार किया है।
इसी बीच राज्य पुलिस प्रमुख (DGP) और कारा महानिरीक्षक (IG Prisons) की ओर से भी अदालत में काउंटर एफिडेविट दाखिल किया गया। हालांकि, मामले की जांच से जुड़ी मेडिकल रिपोर्ट अभी तक न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं की जा सकी। इस पर हाई कोर्ट ने असंतोष व्यक्त करते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा।
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी या निर्दोष ठहराना नहीं है, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच सुनिश्चित करना है। इसी क्रम में कोर्ट ने न्यायिक जांच (जुडिशियल इन्क्वायरी) की रिपोर्ट भी तलब की है, ताकि मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
हाई कोर्ट ने सभी आवश्यक दस्तावेजों और जांच रिपोर्टों को रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 17 जून निर्धारित की है। अब निगाहें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां जांच की प्रगति और लंबित रिपोर्टों को लेकर महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट हो सकती है।