दिशोम गुरु की विरासत को सम्मान, पूर्व सीएम शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण

दिशोम गुरु की विरासत को सम्मान, पूर्व सीएम शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jan 25, 2026, 8:31:00 PM

झारखंड की राजनीति के सबसे बड़े आदिवासी नेताओं में शुमार और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को केंद्र सरकार ने मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान से अलंकृत करने का ऐलान किया है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी पद्म पुरस्कारों की सूची में उनका नाम शामिल किया गया है। उन्हें यह सम्मान सामाजिक और जनआंदोलनों के क्षेत्र में लंबे समय तक किए गए योगदान के लिए दिया गया है।

‘दिशोम गुरु’ के नाम से लोकप्रिय शिबू सोरेन का जीवन संघर्षों से भरा रहा। महज 13 वर्ष की उम्र में उनके पिता की हत्या महाजनों द्वारा कर दी गई थी। इसी घटना ने उन्हें आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए खड़ा होने की प्रेरणा दी। उन्होंने शोषण के खिलाफ आदिवासियों को संगठित किया और महाजनी प्रथा के विरुद्ध आंदोलन की अगुवाई की। बाद में उन्होंने ‘धान कटनी आंदोलन’ की शुरुआत कर किसानों और मजदूरों के हक की लड़ाई को नया आयाम दिया। सूदखोरों के खिलाफ संघर्ष ने उन्हें जननेता के रूप में स्थापित कर दिया।

शिबू सोरेन तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे, हालांकि उन्हें कुल मिलाकर बहुत कम समय तक ही राज्य की सत्ता संभालने का अवसर मिला। पहली बार वे केवल 10 दिनों के लिए मुख्यमंत्री बने। दूसरी बार 28 अगस्त 2008 को उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन करीब पांच महीने बाद 18 जनवरी 2009 को इस्तीफा देना पड़ा। तीसरी बार 30 दिसंबर 2009 को उन्होंने फिर से कमान संभाली, मगर यह कार्यकाल भी लगभग पांच महीने का ही रहा और 31 मई 2010 को उन्होंने पद छोड़ दिया।

राजनीतिक जीवन के साथ-साथ वे लंबे समय तक झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक संरक्षक रहे। केंद्र की यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल में वे कोयला मंत्री भी रहे थे, लेकिन चिरूडीह हत्याकांड में नाम आने के बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था।

स्वास्थ्य कारणों से वे लंबे समय से परेशान चल रहे थे। उन्हें किडनी की गंभीर बीमारी सहित कई अन्य शारीरिक समस्याएं थीं। बेहतर इलाज के लिए उन्हें दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 4 अगस्त को उनका निधन हो गया।

शिबू सोरेन का सफर एक साधारण आदिवासी परिवार से निकलकर देश की संसद और सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने की मिसाल है। पद्म भूषण सम्मान उनके इसी संघर्षपूर्ण और जनसेवा से भरे जीवन को राष्ट्रीय स्तर पर दिया गया सम्मान माना जा रहा है।