झारखंड में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर न्यायिक जांच के दायरे में आ गया है। राज्य के उच्च न्यायालय ने इस मामले में फिलहाल किसी भी प्रकार की अस्थायी राहत देने से इनकार कर दिया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया कि वर्तमान परिस्थिति में भर्ती प्रक्रिया पर रोक या हस्तक्षेप उचित नहीं होगा। साथ ही, मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे आगे की सुनवाई के लिए डिवीजन बेंच के पास भेज दिया गया है।
यह पूरा मामला झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा से जुड़ा है। याचिका दायर करने वाले अभ्यर्थियों ने परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कई अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि परीक्षा के दौरान उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन और ऑनलाइन प्रणाली में संभावित छेड़छाड़ जैसी गंभीर चिंताएं सामने आई हैं।
अभ्यर्थियों ने अदालत से मांग की है कि आयोग मॉडल उत्तर कुंजी सार्वजनिक करे, ताकि वे उस पर आपत्ति दर्ज कर सकें। इसके अलावा उन्होंने पूरी चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की भी अपील की है। याचिका में 8 मई को प्रस्तावित पुनर्परीक्षा को भी चुनौती दी गई है, जिस पर अब कोर्ट का अंतिम निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दूसरी ओर, JSSC ने अदालत में दलील दी कि इसी विषय से संबंधित एक याचिका पहले से ही डिवीजन बेंच के समक्ष लंबित है। आयोग का कहना था कि अलग-अलग पीठों में समान मुद्दों पर सुनवाई से भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। इस तर्क को स्वीकार करते हुए अदालत ने वर्तमान याचिका को भी उसी पीठ के पास भेजने का निर्देश दिया।
फिलहाल राहत नहीं मिलने से अभ्यर्थियों में निराशा का माहौल है, लेकिन अब सभी की निगाहें डिवीजन बेंच की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं। वहीं, यह फैसला तय करेगा कि पुनर्परीक्षा आयोजित होगी या नहीं और भर्ती प्रक्रिया में उठाए गए सवालों का क्या समाधान निकलता है।