रिम्स परिसर विवाद पर हाईकोर्ट सख्त, अवैध अपार्टमेंट ध्वस्त होंगे, दोषियों से ही मिलेगा खरीदारों को मुआवजा

रिम्स परिसर विवाद पर हाईकोर्ट सख्त, अवैध अपार्टमेंट ध्वस्त होंगे, दोषियों से ही मिलेगा खरीदारों को मुआवजा

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Dec 22, 2025, 11:49:00 AM

झारखंड हाईकोर्ट ने राजधानी रांची के DIG ग्राउंड क्षेत्र में स्थित रिम्स (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान) की जमीन पर हुए अवैध निर्माण को लेकर कड़ा और मिसाल कायम करने वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि वर्ष 1964–65 में चिकित्सा संस्थान के विस्तार के लिए अधिग्रहित की गई जमीन पर बने बहुमंजिला अवैध अपार्टमेंट को पूरी तरह गिराया जाएगा। इसके साथ ही, इन इमारतों में फ्लैट खरीदने वाले लोगों को मुआवजा तो मिलेगा, लेकिन इसकी भरपाई सरकारी खजाने से नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों और बिल्डरों से कराई जाएगी।

मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जिन लोगों ने सरकारी जमीन को निजी बताकर बेचने का गंभीर अपराध किया है, वही इसकी कीमत चुकाएंगे। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि निर्दोष फ्लैट खरीदारों का नुकसान किसी भी परिस्थिति में राज्य सरकार वहन नहीं करेगी।

इस पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने जांच की जिम्मेदारी एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को सौंपी है। साथ ही यह भी संकेत दिया गया है कि यदि जांच में जरूरत पड़ी, तो भविष्य में सीबीआई जांच का रास्ता भी खुला रहेगा। अदालत ने संबंधित अधिकारियों और बिल्डरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने तथा उनकी भूमिका तय कर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि मोरहाबादी और कोकर मौजा में फैली करीब 9.65 एकड़ रिम्स की जमीन पर लंबे समय से अवैध कब्जा किया गया। इस भूमि पर न सिर्फ मंदिर, बाजार और कच्चे मकान बनाए गए, बल्कि चार से अधिक मंजिला अपार्टमेंट भी खड़े कर दिए गए। यह वही जमीन है, जिसे दशकों पहले सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान के लिए अधिग्रहित किया गया था।

अदालत के समक्ष यह भी सामने आया कि राजस्व अभिलेखों में कथित हेराफेरी, अवैध म्यूटेशन, गलत रजिस्ट्रेशन और नगर निगम की संभावित मिलीभगत के जरिए इस सरकारी जमीन को निजी प्लॉट के रूप में दिखाकर बेचा गया। हाईकोर्ट ने इसे गंभीर प्रशासनिक और कानूनी चूक बताते हुए कहा कि दोषियों की जवाबदेही तय करना अनिवार्य है।

इस फैसले को सरकारी जमीनों पर अवैध निर्माण और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है, जिसमें अदालत ने साफ कर दिया है कि कानून से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।