ग्रामीण पुलों के गिरने पर हाईकोर्ट सख्त, सचिव को हलफनामा दाखिल करने का अल्टीमेटम

ग्रामीण पुलों के गिरने पर हाईकोर्ट सख्त, सचिव को हलफनामा दाखिल करने का अल्टीमेटम

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Feb 18, 2026, 4:23:00 PM

झारखंड में ग्रामीण विकास विभाग द्वारा निर्मित पुलों के टूटने को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर झारखंड उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने विभाग के सचिव को स्पष्ट चेतावनी देते हुए 24 फरवरी 2026 तक शपथ पत्र दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया है। तय समयसीमा में जवाब नहीं आने की स्थिति में सचिव को व्यक्तिगत रूप से 10,000 रुपये का जुर्माना भरना होगा।

यह निर्देश मुख्य न्यायाधीश एम. एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने पंकज कुमार यादव की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया। याचिका में दावा किया गया है कि बीते एक दशक में ग्रामीण विकास विभाग द्वारा बनाए गए कई पुल क्षतिग्रस्त हो गए या पूरी तरह टूट चुके हैं, जिससे सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह अंतिम मौका है। पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित तिथि तक हलफनामा दाखिल नहीं किया गया, तो लगाया गया जुर्माना राज्य सरकार या सरकारी कोष से नहीं, बल्कि संबंधित सचिव को अपनी निजी राशि से याचिकाकर्ता को देना होगा।

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि इससे पहले 27 नवंबर 2025 को अधिकारियों को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद 9 जनवरी 2026 को भी राज्य सरकार ने सकारात्मक आश्वासन दिया, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई शपथ पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया।

खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को भी राहत देते हुए कहा कि यदि वे चाहें, तो 11 मार्च 2026 तक अपना प्रत्युत्तर दाखिल कर सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च 2026 को तय की गई है।