रांची में ध्वस्तीकरण पर हाईकोर्ट सख्त, हेहल CO की कार्यशैली पर उठे सवाल

रांची में ध्वस्तीकरण पर हाईकोर्ट सख्त, हेहल CO की कार्यशैली पर उठे सवाल

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Apr 10, 2026, 1:20:00 PM

झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के सुखदेवनगर इलाके में अतिक्रमण हटाने के दौरान की गई कार्रवाई को लेकर प्रशासन की कार्यशैली पर कड़ा रुख अपनाया है। महादेव उरांव द्वारा दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान अदालत ने हेहल के अंचल अधिकारी (सीओ) की कार्रवाई पर गंभीर आपत्ति जताई और स्पष्ट जवाब मांगा।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह सवाल उठाया कि जब निर्देश केवल भूमि से अतिक्रमण हटाने का था, तो वहां मौजूद संरचनाओं को गिराने की जरूरत क्यों पड़ी। अदालत ने प्रशासन से पूछा कि निर्माण ध्वस्त करने का निर्णय किन कानूनी प्रावधानों के तहत लिया गया। इस पर कोर्ट ने नाराजगी भी जाहिर की।

अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए अंचल अधिकारी ने बताया कि संबंधित पक्षों को तीन बार नोटिस जारी किए गए थे। इसके बावजूद उन्होंने आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए, जिसके बाद नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए निर्माण हटाया गया। हालांकि, कोर्ट इस जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आया और मामले की गहन जांच की जरूरत पर बल दिया।

इस दौरान न्यायालय ने याचिकाकर्ता की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। अदालत ने पूछा कि रिट याचिका दायर करते समय हस्तक्षेपकर्ताओं के साथ हुए समझौते और वित्तीय लेन-देन की जानकारी क्यों नहीं दी गई। इस संबंध में याचिकाकर्ता से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा गया है।

साथ ही, अदालत ने हस्तक्षेपकर्ताओं की याचिका को स्वीकार करते हुए उन्हें इस मामले में पक्षकार बनाने की अनुमति दे दी है। प्रभावित लोगों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर पहले से लगी रोक को फिलहाल बरकरार रखा गया है। मामले की अगली सुनवाई 8 मई को निर्धारित की गई है।