ईंट भट्ठा उद्योग पर हाईकोर्ट सख्त, मिट्टी उत्खनन के लिए पर्यावरण मंजूरी और DMFT भुगतान अनिवार्य

ईंट भट्ठा उद्योग पर हाईकोर्ट सख्त, मिट्टी उत्खनन के लिए पर्यावरण मंजूरी और DMFT भुगतान अनिवार्य

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jan 19, 2026, 12:15:00 PM

झारखंड हाईकोर्ट के ताजा फैसले ने राज्य के ईंट भट्ठा संचालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि ईंट निर्माण के लिए मिट्टी निकालने पर अब पर्यावरण स्वीकृति (Environmental Clearance), प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संचालन अनुमति (CTO) और डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) में निर्धारित अंशदान देना अनिवार्य होगा।

न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने ईंट भट्ठा मालिकों की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए राज्य सरकार की कार्रवाई को वैध ठहराया। कोर्ट ने कहा कि ईंट बनाने में प्रयुक्त मिट्टी ‘लघु खनिज’ की श्रेणी में आती है, जिस पर झारखंड माइनर मिनरल कंसेशन रूल्स, 2004 पूरी तरह लागू होते हैं।

क्या था विवाद
पूर्वी सिंहभूम समेत कई जिलों के ईंट भट्ठा संचालकों ने अदालत में दलील दी थी कि मिट्टी निकालना खनन नहीं है, इसलिए इसके लिए पर्यावरण मंजूरी, CTO या DMFT शुल्क लागू नहीं होना चाहिए। उनका तर्क था कि ईंट भट्ठे खनन गतिविधि की श्रेणी में नहीं आते।

15 जनवरी को हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि ईंट निर्माण की पूरी प्रक्रिया मिट्टी के उत्खनन से शुरू होती है, इसलिए दोनों को अलग नहीं किया जा सकता। बड़े पैमाने पर मिट्टी निकालने से जमीन, जल और वायु पर नकारात्मक असर पड़ता है।

अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि केंद्र सरकार पहले ही ईंट निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी को ‘माइनर मिनरल’ घोषित कर चुकी है। चूंकि खनिज संसाधनों के दोहन से पर्यावरण और स्थानीय समुदाय प्रभावित होते हैं, इसलिए उनकी क्षतिपूर्ति के लिए बने DMFT फंड में ईंट भट्ठा संचालकों को भी योगदान देना होगा।