JPSC-JSSC पर फिर घिर गई सरकार, आजसू छात्र संघ ने खोला मोर्चा

JPSC-JSSC पर फिर घिर गई सरकार, आजसू छात्र संघ ने खोला मोर्चा

रांची में गुरुवार को प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर छात्रों का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दिया। आजसू छात्र संघ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से मार्च निकालते हुए राजभवन (लोकभवन) की ओर बढ़े। प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। राजभवन के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और कई स्थानों पर बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका गया।

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों, पेपर लीक और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, जिससे प्रतियोगी छात्रों का भरोसा कमजोर हुआ है और उनके भविष्य पर अनिश्चितता का संकट पैदा हो गया है।

छात्र संगठनों ने मांग की कि JPSC प्रारंभिक परीक्षा में सामने आए कथित विवादों की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। उनका कहना है कि केवल CID जांच पर्याप्त नहीं है और पूरे मामले की CBI से निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि प्रारंभिक परीक्षा में व्यापक अनियमितताएं हुई हैं, इसलिए परीक्षा को निरस्त कर पारदर्शी तरीके से दोबारा आयोजित किया जाए।

आंदोलन के दौरान शिक्षक (आचार्य) नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि नियुक्ति प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, जिससे कई योग्य अभ्यर्थियों को अवसर नहीं मिल सका। इसके अलावा छात्रों ने झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) से लंबित JTET परीक्षा की तिथि शीघ्र घोषित करने की मांग की।

छात्रों ने छात्रवृत्ति वितरण में हो रही देरी को भी प्रमुख मुद्दा बताया। उनका कहना था कि पिछले लगभग दो वर्षों से बड़ी संख्या में पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिल पाया है। इसके साथ ही उन्होंने परीक्षा प्रणाली में अधिक पारदर्शिता की मांग करते हुए उत्तर पुस्तिकाओं और प्राप्त अंकों तक अभ्यर्थियों की आसान पहुंच सुनिश्चित करने की बात कही। उनका तर्क था कि समय पर भर्तियां नहीं होने और परीक्षा प्रक्रिया में स्पष्टता की कमी के कारण युवाओं में बेरोजगारी के साथ मानसिक दबाव भी लगातार बढ़ रहा है।

प्रदर्शन के अंत में छात्र नेताओं ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 10 अगस्त को विधानसभा का घेराव किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर झारखंड में भी व्यापक छात्र आंदोलन खड़ा किया जाएगा, ताकि युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार को ठोस कदम उठाने के लिए मजबूर किया जा सके।