गन्ना किसानों के लिए खुशखबरी, बिहार में 25 नई चीनी मिलों का रास्ता साफ

गन्ना किसानों के लिए खुशखबरी, बिहार में 25 नई चीनी मिलों का रास्ता साफ

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jun 25, 2026, 6:09:00 PM

बिहार सरकार ने गन्ना आधारित उद्योगों के विकास, किसानों की आमदनी बढ़ाने और राज्य के पारंपरिक चीनी उद्योग को पुनर्जीवित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 24 जून 2026 को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में बिहार गन्ना उद्योग प्रोत्साहन नीति-2026 को मंजूरी दे दी गई। सरकार का दावा है कि यह नीति राज्य में निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ कृषि और उद्योग के बीच मजबूत संबंध स्थापित करेगी।

नई नीति की खास बात यह है कि इसमें गन्ना क्षेत्र से जुड़े विभिन्न उद्योगों; जैसे चीनी उत्पादन, इथेनॉल निर्माण, सह-विद्युत उत्पादन और कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) संयंत्रों को एक ही ढांचे में प्रोत्साहन देने की व्यवस्था की गई है। सरकार के अनुसार, इस तरह की समग्र नीति लागू करने वाला बिहार देश का पहला राज्य बन गया है।

नीति के तहत नई चीनी मिलों की स्थापना को बढ़ावा देने के लिए निवेशकों को आकर्षक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। 5000 टीसीडी (टन क्रशिंग क्षमता प्रतिदिन) वाली नई चीनी मिल लगाने पर पांच वर्षों के दौरान अधिकतम 100 करोड़ रुपये तक की सहायता मिलेगी। वहीं 3500 टीसीडी क्षमता की इकाइयों के लिए 70 करोड़ रुपये तक का अनुदान निर्धारित किया गया है। मौजूदा मिलों में कम से कम 1000 टीसीडी क्षमता वृद्धि करने पर 15 करोड़ रुपये तक की सहायता दी जाएगी, जबकि अधिक विस्तार की स्थिति में अतिरिक्त लाभ भी उपलब्ध होंगे।

भूमि संबंधी बाधाओं को कम करने के लिए सरकार ने विशेष प्रावधान किए हैं। गन्ना उद्योग विभाग या बिहार राज्य चीनी निगम के पास उपलब्ध भूमि में से अधिकतम 40 एकड़ क्षेत्र निवेशकों को 30 वर्ष की अवधि के लिए मात्र एक रुपये की प्रतीकात्मक राशि पर लीज पर दिया जाएगा। इसके अलावा भूमि खरीद पर लगने वाले स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क की पूरी भरपाई की जाएगी। उत्पादित चीनी पर पांच वर्षों तक राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) की शत-प्रतिशत प्रतिपूर्ति का भी प्रावधान है।

सिर्फ नई इकाइयों पर ही नहीं, बल्कि कार्यरत चीनी मिलों के आधुनिकीकरण पर भी सरकार का जोर है। मिलों को आधुनिक तकनीक से लैस करने, उनका उन्नयन करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर की रिफाइनरी में परिवर्तित करने के लिए पूंजी निवेश का 20 प्रतिशत या अधिकतम पांच करोड़ रुपये तक सहायता राशि प्रदान की जाएगी।

इथेनॉल और डिस्टिलरी क्षेत्र को भी इस नीति में प्राथमिकता दी गई है। नई इकाइयों की स्थापना या क्षमता विस्तार के लिए प्लांट एवं मशीनरी पर किए गए निवेश का 15 प्रतिशत अथवा अधिकतम पांच करोड़ रुपये तक अनुदान दिया जाएगा। इसके साथ ही ऋण पर ब्याज सहायता और उत्पादित इथेनॉल पर एसजीएसटी की पूर्ण प्रतिपूर्ति की सुविधा भी मिलेगी।

हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सह-विद्युत उत्पादन परियोजनाओं और सीबीजी संयंत्रों को भी विशेष प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है। इससे गन्ना उद्योग से निकलने वाले अवशेषों का बेहतर उपयोग संभव होगा और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को गति मिलेगी।

सरकार ने सात निश्चय-3 कार्यक्रम के तहत बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से चालू करने और 25 नई चीनी मिलों की स्थापना का लक्ष्य तय किया है। अधिकारियों का मानना है कि नई नीति के लागू होने से राज्य में बड़े निवेश आएंगे, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध होगा। साथ ही बिहार की पहचान एक प्रमुख गन्ना और चीनी उत्पादक राज्य के रूप में और मजबूत होने की उम्मीद है।