बड़कागांव की पूर्व विधायक और कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव अंबा प्रसाद ने खुलकर पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाते हुए कांग्रेस और सहयोगी दल झामुमो दोनों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रविवार को रांची प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि उनके परिवार के साथ लगातार अन्याय हो रहा है, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने कभी साथ नहीं दिया।
अंबा प्रसाद ने अपने पिता और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को पार्टी से निकाले जाने को अनुचित बताते हुए कहा कि यह फैसला निष्पक्ष नहीं, बल्कि दबाव में लिया गया प्रतीत होता है। उनके अनुसार, निष्कासन से पहले न तो कोई स्पष्ट कारण बताया गया और न ही पक्ष रखने का अवसर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अन्य विधायक सार्वजनिक रूप से मंत्रियों पर टिप्पणी करते हैं, तब उन पर कार्रवाई क्यों नहीं होती।
उन्होंने कांग्रेस प्रवक्ता राकेश सिन्हा और झामुमो के मनोज पांडेय पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यदि गठबंधन और पार्टी के भीतर अपनी बात रखने की कोई औपचारिक प्रक्रिया है, तो उन्हें इसकी जानकारी दी जानी चाहिए थी। अंबा ने आरोप लगाया कि प्रदेश नेतृत्व को इस बात से आपत्ति थी कि उन्होंने सीधे केंद्रीय नेतृत्व से संपर्क क्यों किया।
प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने अपने परिवार पर हुए प्रशासनिक और कानूनी दबावों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि इस वर्ष उनके पिता पर कई मामले दर्ज किए गए, जिन्हें वे झूठा बताते हैं। इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें धमकियां मिलीं, लेकिन पार्टी के किसी नेता ने हस्तक्षेप नहीं किया।
अंबा प्रसाद ने एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी मां को पुलिस द्वारा अपमानजनक स्थिति में थाने ले जाया गया, जबकि उनके घर पर बुलडोजर चलाया गया और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इन कार्रवाइयों के दौरान राज्य सरकार और पार्टी नेतृत्व ने कोई संवेदनशीलता नहीं दिखाई।
एनटीपीसी द्वारा की गई कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि कथित तौर पर न्यायालय के निर्देशों की अनदेखी कर जल्दबाजी में घर तोड़ा गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी एजेंसियां सत्ता के प्रभाव में काम कर रही हैं और कानून के प्रावधानों का चयनात्मक इस्तेमाल किया जा रहा है।
अंबा प्रसाद ने कहा कि उनके पिता ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और एनटीपीसी के खिलाफ अपनी बात रखी थी, लेकिन उसमें कोई आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं किया गया था। इसके बावजूद इतनी कड़ी कार्रवाई करना उचित नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपने पिता के निष्कासन सहित सभी मुद्दों को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष रखेंगी। साथ ही उन्होंने कहा कि आत्मसम्मान के साथ समझौता लंबे समय तक संभव नहीं है और यदि न्याय नहीं मिला तो वे आगे भी अपनी आवाज उठाती रहेंगी।