96 घंटे बाद भी लापता उद्यमी का बेटा, कई राज्यों में छापेमारी तेज

96 घंटे बाद भी लापता उद्यमी का बेटा, कई राज्यों में छापेमारी तेज

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jan 17, 2026, 11:21:00 AM

जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित सीएच एरिया से लापता हुए उद्यमी देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी को ढूंढे चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस को अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिल पाई है। समय के साथ जांच की दिशा स्पष्ट रूप से अपहरण की आशंका की ओर मुड़ गई है। शुरुआती पड़ताल और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि कैरव को जबरन ले जाया गया हो सकता है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जिस स्कॉर्पियो वाहन से कैरव को ले जाने की बात सामने आई है, वह अब तक बरामद नहीं हो सका है। शुरुआती जानकारी में वाहन पर पुलिस का स्टीकर लगे होने का दावा किया गया था, लेकिन इसके पीछे कौन लोग थे और स्टीकर कैसे लगाया गया, यह रहस्य अब भी बना हुआ है। कैरव की तलाश और संदिग्धों की धरपकड़ के लिए पुलिस की टीमें लगातार अलग-अलग राज्यों में दबिश दे रही हैं।

सीसीटीवी से खुलते जा रहे हैं नए संकेत

जांच के दौरान सामने आया है कि संदिग्ध स्कॉर्पियो शुक्रवार दोपहर करीब 1:29 बजे चांडिल के पाटा टोल प्लाजा से गुजरी थी। इसके कुछ ही देर बाद रिवर व्यू होटल के पास लगे कैमरों में वही वाहन बिना पुलिस स्टीकर के नजर आया। हैरानी की बात यह है कि पाटा टोल और रिवर व्यू होटल के बीच महज दो किलोमीटर की दूरी तय करने में वाहन को लगभग 22 मिनट लगे। पुलिस को संदेह है कि इसी दौरान स्टीकर हटाया गया।

पुलिस का अनुमान है कि इसके बाद अपहरणकर्ताओं ने मार्ग बदलकर पुरुलिया रोड की ओर रुख किया और संभवतः कैरव को किसी अन्य वाहन में स्थानांतरित कर दिया गया। बाद में पुरुलिया में मिले सीसीटीवी फुटेज में स्कॉर्पियो में केवल चालक के मौजूद होने की पुष्टि हुई है, जिससे इस आशंका को और बल मिला है।

पुराने अपहरण गिरोह भी रडार पर

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने पुराने अपहरण गिरोहों की फाइलें भी खंगालनी शुरू कर दी हैं। सूत्रों के अनुसार, बिहार के कुख्यात अपहरणकर्ता चंदन सोनार और उसके नेटवर्क की भूमिका की भी जांच हो रही है। चंदन सोनार 2025 में दीपावली से पहले हजारीबाग जेल से रिहा हुआ था। इसी कड़ी में एसआईटी ने पटना, हाजीपुर और जहानाबाद में छापेमारी की, हालांकि अब तक कोई निर्णायक सुराग हाथ नहीं लगा है।

पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर जिला पुलिस पिछले एक दशक में अपहरण और फिरौती से जुड़े मामलों में सक्रिय गिरोहों का डाटा खंगाल रही है। झारखंड के अलावा बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में सक्रिय नेटवर्क के पैटर्न की भी जांच की जा रही है। कैरव की तलाश के लिए इन राज्यों में भी टीमें तैनात की गई हैं।

कुख्यात नाम: चंदन सोनार

हाजीपुर का रहने वाला चंदन सोनार ‘किडनैपिंग किंग’ के नाम से बदनाम रहा है। उस पर देश के 12 राज्यों में 40 से अधिक अपहरण के मामले दर्ज बताए जाते हैं। झारखंड में भी कई हाई-प्रोफाइल मामलों में उसका नाम सामने आ चुका है। वर्ष 2023 में उसके दो सहयोगियों को रांची पुलिस ने गिरफ्तार किया था, जबकि गिरोह के अन्य सदस्य अब भी फरार बताए जाते हैं।