अतिक्रमण बना बिरसा मुंडा एयरपोर्ट विस्तार की सबसे बड़ी रुकावट, प्रशासन ने जारी किया नोटिस

अतिक्रमण बना बिरसा मुंडा एयरपोर्ट विस्तार की सबसे बड़ी रुकावट, प्रशासन ने जारी किया नोटिस

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Feb 13, 2026, 2:28:00 PM

रांची स्थित बिरसा मुंडा एयरपोर्ट के विस्तारीकरण की प्रक्रिया अतिक्रमण के कारण धीमी पड़ गई है। विस्तार कार्य के लिए चिन्हित भूमि पर बने मकानों और एक मंदिर के चलते परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है। अब जिला प्रशासन ने इस जमीन को खाली कराने की दिशा में कदम उठाते हुए संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर जल्द से जल्द कब्जा हटाने का निर्देश दिया है।

जानकारी के मुताबिक, एयरपोर्ट विस्तार के लिए राज्य सरकार ने 301 एकड़ भूमि 30 वर्षों की लीज पर उपलब्ध कराई थी। हालांकि, इस जमीन पर अब भी करीब 128 घर और मंदिर मौजूद हैं, जिससे निर्माण कार्यों में बाधा उत्पन्न हो रही है। एयरपोर्ट प्रबंधन ने प्रशासन से जमीन शीघ्र मुक्त कराने का अनुरोध किया है।

अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही अतिक्रमण हटेगा, लंबित योजनाओं पर तेजी से काम शुरू किया जाएगा। भूमि उपलब्ध होने के बाद कैट-टू (CAT-II) लाइटिंग सिस्टम और पैरेलल टैक्सी ट्रैक का निर्माण पूरा किया जाना है। इन सुविधाओं के लागू होने से कम दृश्यता की स्थिति में भी विमानों की लैंडिंग आसान होगी और उड़ान संचालन अधिक सुचारू हो सकेगा।

एयरपोर्ट प्रशासन ने इस वर्ष कई विकास योजनाएं पूरी करने का लक्ष्य तय किया है। इसके तहत सुरक्षा जांच काउंटरों की संख्या 3 से बढ़ाकर 8 करने की योजना है। वहीं डिपार्चर एरिया को एक से बढ़ाकर दो किया जाएगा ताकि यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सके। इसके साथ ही एयरलाइंस काउंटरों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। अभी जहां 16 काउंटर संचालित हैं, वहीं नए निर्माण के बाद कुल 38 काउंटर उपलब्ध होंगे, जिसमें 22 नए काउंटर शामिल रहेंगे।

इसके अलावा एयरपोर्ट में यात्रियों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए एंट्री और एग्जिट गेट की संख्या भी एक से बढ़ाकर दो करने की तैयारी चल रही है। इससे भीड़ कम होगी और संचालन अधिक व्यवस्थित हो सकेगा।

गौरतलब है कि 31 दिसंबर 2025 को केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ की अध्यक्षता में एयरपोर्ट सुरक्षा समिति की बैठक हुई थी। उस बैठक में विस्तार कार्य के लिए चिन्हित जमीन जल्द उपलब्ध कराने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया था कि समय पर जमीन खाली नहीं होने की स्थिति में विकास परियोजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसके बाद जिला प्रशासन पर कार्रवाई तेज करने और अतिक्रमण हटाने को लेकर दबाव बढ़ाने का निर्णय लिया गया था।