TET विसंगति पर शिक्षा विभाग सख्त, राज्य के 3 हजार पारा शिक्षकों के वेतन में होगी सीधी कटौती

TET विसंगति पर शिक्षा विभाग सख्त, राज्य के 3 हजार पारा शिक्षकों के वेतन में होगी सीधी कटौती

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Dec 19, 2025, 1:56:00 PM

झारखंड में कार्यरत पारा शिक्षकों के लिए शिक्षा विभाग का नया आदेश बड़ा झटका बनकर सामने आया है। टेट (Teacher Eligibility Test) से जुड़ी विसंगति वाले लगभग 3000 पारा शिक्षकों को अब बढ़ा हुआ मानदेय नहीं मिलेगा। राज्य परियोजना निदेशक (SPD) की ओर से जारी निर्देश के बाद इन शिक्षकों की पहचान अब ‘TET पास पारा शिक्षक’ के रूप में नहीं की जाएगी, जिसका सीधा असर उनकी मासिक आय पर पड़ेगा।

इस फैसले के साथ ही राज्य में लंबे समय से चला आ रहा TET विसंगति का विवाद फिर से चर्चा में आ गया है। आदेश जारी होते ही पारा शिक्षकों के बीच असंतोष और नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है।

क्या कहता है शिक्षा विभाग का आदेश

राज्य परियोजना निदेशक ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) और जिला शिक्षा अधीक्षकों (DSE) को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि—

  • TET विसंगति वाले पारा शिक्षकों को TET उत्तीर्ण की श्रेणी में शामिल न किया जाए

  • ऐसे शिक्षकों को केवल प्रशिक्षित पारा शिक्षक के बराबर मानदेय दिया जाए

  • यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू की जाए

इन निर्देशों के लागू होते ही उन शिक्षकों का वेतन घट जाएगा, जिन्हें अब तक TET पास होने के आधार पर अतिरिक्त मानदेय मिल रहा था।

TET विसंगति आखिर है क्या

TET विसंगति उन मामलों को कहा जाता है, जहां पारा शिक्षक की नियुक्ति जिस शैक्षणिक स्तर के लिए हुई थी, उसने उस स्तर के बजाय किसी अन्य स्तर की TET परीक्षा उत्तीर्ण की। जैसे—

  • कक्षा 6 से 8 के लिए नियुक्त शिक्षक का कक्षा 1 से 5 की TET पास होना

  • या प्राथमिक स्तर पर नियुक्त शिक्षक द्वारा उच्च प्राथमिक TET पास करना

शिक्षा विभाग के नए आदेश में साफ किया गया है कि जिस श्रेणी में नियुक्ति हुई है, उसी श्रेणी की TET परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य माना जाएगा।

मानदेय पर कितना पड़ेगा असर

नए फैसले के बाद—

  • TET विसंगति वाले शिक्षक TET पास पारा शिक्षक का वेतन नहीं पा सकेंगे

  • उन्हें प्रशिक्षित पारा शिक्षक के अनुरूप ही मानदेय मिलेगा

  • इससे हर महीने उनकी आय में हजारों रुपये की कमी आएगी

यही वजह है कि पारा शिक्षकों के बीच इस निर्णय को लेकर गहरी नाराजगी देखी जा रही है।

शिक्षक संगठनों का विरोध

पारा शिक्षक संगठनों ने इस आदेश को अन्यायपूर्ण बताते हुए कड़ा ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि वर्षों तक सेवा देने के बाद इस तरह का फैसला शिक्षकों के साथ असंवेदनशील व्यवहार है। संगठनों का आरोप है कि सरकार पहले इस समस्या के समाधान का भरोसा देती रही, लेकिन अब सीधे वेतन कटौती का रास्ता अपनाया गया। कई संगठनों ने आंदोलन और कानूनी विकल्प पर विचार करने के संकेत भी दिए हैं।

विभाग का पक्ष

वहीं शिक्षा विभाग का तर्क है कि शिक्षण व्यवस्था की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियुक्ति स्तर के अनुरूप TET अनिवार्य है। विभाग का कहना है कि नियमों के तहत पात्रता और नियुक्ति में सामंजस्य जरूरी है और विसंगति के बावजूद TET पास का लाभ देना नियमों के खिलाफ है।