JPSC-2 घोटाले में ईडी की एंट्री, मनी लॉन्ड्रिंग केस दर्ज; 60 लोग जांच के घेरे में

JPSC-2 घोटाले में ईडी की एंट्री, मनी लॉन्ड्रिंग केस दर्ज; 60 लोग जांच के घेरे में

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jan 15, 2026, 10:37:00 AM

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की दूसरी सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर अब जांच का दायरा और बढ़ गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की पड़ताल के लिए ECIR दर्ज कर ली है। ईडी ने सीबीआई द्वारा आरोपित सभी 60 व्यक्तियों को इस केस में अभियुक्त के रूप में शामिल किया है।

ईडी की प्रारंभिक जांच में आरोप है कि JPSC-2 परीक्षा के दौरान अयोग्य उम्मीदवारों को जानबूझकर सफल घोषित किया गया और इस प्रक्रिया में अवैध लेनदेन हुआ। इसी आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की धारा के तहत कार्रवाई शुरू की गई है।

कौन-कौन हैं जांच के दायरे में

ईडी की ओर से जिन 60 लोगों को अभियुक्त बनाया गया है, उनमें आयोग से जुड़े छह वरिष्ठ अधिकारी, गलत तरीके से चयनित होकर बाद में अफसर बने 28 परीक्षार्थी, लिखित परीक्षा और साक्षात्कार में नंबर बढ़ाने के आरोपों से जुड़े 25 परीक्षक, और ग्लोबल/ग्लोबर इन्फॉर्मेटिक्स कंपनी का एक मैनेजर शामिल है।

आयोग से जुड़े जिन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है, उनमें JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष और सदस्य भी शामिल हैं। इनमें पूर्व अध्यक्ष दिलीप कुमार प्रसाद का नाम प्रमुख है, जो पहले सदस्य, फिर कार्यकारी अध्यक्ष और बाद में अध्यक्ष बने थे। वे लगभग 29 जनवरी 2002 से 13 अप्रैल 2010 तक आयोग में विभिन्न पदों पर कार्यरत रहे।

प्रमोशन पा चुके अफसर भी शामिल

ईडी की ECIR में जिन तत्कालीन परीक्षार्थियों को अभियुक्त बनाया गया है, वे आज अलग-अलग सेवाओं में उच्च पदों पर हैं। इनमें राज्य प्रशासनिक सेवा के कई अधिकारी ADM रैंक तक प्रोन्नत हो चुके हैं, वहीं राज्य पुलिस सेवा (DSP) से चयनित कुछ अधिकारी आगे चलकर IPS कैडर में भी पहुंच चुके हैं।

लंबी जांच का इतिहास

JPSC-2 परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद शुरुआत में सरकार ने एसीबी जांच के आदेश दिए थे। जांच की गति और प्रगति से असंतोष के चलते हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई, जिसके बाद अदालत ने मामला CBI को सौंप दिया। हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने वर्ष 2012 में प्राथमिकी दर्ज की थी। हालांकि कानूनी अड़चनों के कारण सीबीआई को इस केस में 12 साल बाद, 2024 में आरोप पत्र दाखिल करना पड़ा। फिलहाल सीबीआई केस में सभी आरोपी जमानत पर हैं।

अब ईडी द्वारा दर्ज ECIR के बाद इस पूरे मामले में धन के लेनदेन, अवैध लाभ और संपत्ति अर्जन की विस्तृत जांच की जाएगी। माना जा रहा है कि इस कार्रवाई से JPSC-2 घोटाले से जुड़े कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं।