झारखंड हाईकोर्ट ने 7वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा-2021 से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में दिव्यांग अभ्यर्थियों के आरक्षण को लेकर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने आयोग को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता सदानंद कुमार की नियुक्ति के लिए 12 सप्ताह के भीतर आवश्यक अनुशंसा की जाए।
यह मामला परीक्षा में दिव्यांग वर्ग के लिए आरक्षित पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित था। भर्ती प्रक्रिया के दौरान कुल 252 रिक्तियों में से 7 पद दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित किए गए थे। हालांकि, आयोग ने केवल चार दिव्यांग उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया और अंततः तीन का ही चयन किया। इस प्रकार चार आरक्षित पद रिक्त रह गए, जिन्हें बाद में अन्य श्रेणियों के अभ्यर्थियों से भर दिया गया।
याचिकाकर्ता सदानंद कुमार ने अदालत में दावा किया कि उन्होंने परीक्षा में 580 अंक प्राप्त किए थे, जो चयनित दिव्यांग उम्मीदवारों में से एक के बराबर थे। इसके बावजूद उन्हें चयन सूची में शामिल नहीं किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता आवश्यक पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं और उनके मामले में दिव्यांग श्रेणियों के बीच इंटरचेंज (परस्पर समायोजन) के प्रावधान का लाभ दिया जाना चाहिए था।
सुनवाई के दौरान JPSC ने भी यह स्वीकार किया कि दिव्यांग वर्ग के चार पद रिक्त रह गए थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे पदों को निर्धारित नियमों के अनुरूप भरना अनिवार्य है और उन्हें बिना उचित प्रक्रिया अपनाए अन्य श्रेणियों के अभ्यर्थियों से भरना उचित नहीं माना जा सकता।
न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकलपीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए आयोग को निर्देश दिया कि वह 12 सप्ताह के भीतर सदानंद कुमार की नियुक्ति के संबंध में आवश्यक अनुशंसा जारी करे। यह फैसला राज्य में दिव्यांग अभ्यर्थियों के आरक्षण अधिकारों और भर्ती प्रक्रिया में नियमों के पालन को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।