डेपुटेशन पर तैनात शिक्षकों को हाईकोर्ट से राहत, मिलेगा अकादमिक भत्ता

डेपुटेशन पर तैनात शिक्षकों को हाईकोर्ट से राहत, मिलेगा अकादमिक भत्ता

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : May 02, 2026, 12:59:00 PM

झारखंड में प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर कार्यरत सरकारी डॉक्टरों और शिक्षकों को लेकर चल रहा लंबा विवाद अब समाप्त हो गया है। राज्य के उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि जो कर्मचारी शैक्षणिक कार्य में लगे हैं, उन्हें अकादमिक भत्ते से वंचित नहीं किया जा सकता। इस फैसले से खासकर रिम्स (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान) में कार्यरत प्रोफेसरों और डॉक्टरों को बड़ी राहत मिली है।

यह मामला उन चिकित्सकों और शिक्षकों से जुड़ा था, जो मूल रूप से सरकारी सेवा में रहते हुए मेडिकल कॉलेजों में अध्यापन कर रहे हैं। राज्य सरकार ने वर्ष 2019 में एक आदेश जारी कर ऐसे कर्मियों को अकादमिक भत्ता देने से इंकार कर दिया था। इसके विरोध में करीब 70 शिक्षकों ने न्यायालय की शरण ली थी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि वे पूर्णकालिक रूप से शिक्षण कार्य कर रहे हैं और अन्य राष्ट्रीय संस्थानों, जैसे एम्स, में इस तरह के भत्ते का प्रावधान है। उनका कहना था कि समान कार्य करने के बावजूद झारखंड में उन्हें इस सुविधा से वंचित रखना भेदभावपूर्ण है।

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सरकार के 2019 के फैसले को निरस्त कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि समान प्रकृति के कार्य के लिए समान लाभ देना आवश्यक है, और डेपुटेशन पर कार्यरत शिक्षकों को इस आधार पर अलग नहीं रखा जा सकता।

गौरतलब है कि रिम्स की गवर्निंग बॉडी ने वर्ष 2018 में ही अकादमिक भत्ता लागू करने का निर्णय लिया था, लेकिन अगले वर्ष राज्य सरकार ने इसे खारिज कर दिया था। अब अदालत के हस्तक्षेप के बाद वह सरकारी आदेश अप्रभावी हो गया है।

इस निर्णय के बाद राज्य में डेपुटेशन पर काम कर रहे कई डॉक्टरों और प्रोफेसरों को आर्थिक रूप से लाभ मिलने की संभावना है। साथ ही, यह फैसला भविष्य में अन्य संस्थानों के लिए भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।