वित्त वर्ष 25-26 शुरुआत में मनरेगा के तहत रोजगार की मांग रही तेज, मानसून के साथ आई सुस्ती

वित्त वर्ष 25-26 शुरुआत में मनरेगा के तहत रोजगार की मांग रही तेज, मानसून के साथ आई सुस्ती

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jan 17, 2026, 2:51:00 PM

झारखंड में चालू वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत काम की मांग के रुझान सामने आए हैं। सरकारी एमआईएस पोर्टल के आंकड़े बताते हैं कि वित्तीय वर्ष के शुरुआती महीनों में ग्रामीण परिवारों ने बड़ी संख्या में मनरेगा के तहत रोजगार की मांग की, जबकि मानसून और ठंड के मौसम में यह मांग धीरे-धीरे घटती चली गई।

अप्रैल–मई में चरम पर रही मांग
आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल और मई 2025 में मनरेगा के तहत काम चाहने वाले परिवारों की संख्या सबसे अधिक रही। मई महीने में यह मांग 13 लाख के पार पहुंच गई। इसके बाद जून से गिरावट का सिलसिला शुरू हुआ, जो जुलाई के बाद और तेज हो गया। अगस्त और सितंबर में वर्क डिमांड अपेक्षाकृत निचले स्तर पर दर्ज की गई।

हालांकि, नवंबर और दिसंबर में इसमें हल्की बढ़ोतरी देखने को मिली, लेकिन जनवरी आते-आते एक बार फिर मांग में कमी दर्ज की गई।

कृषि चक्र और मौसम का असर
विशेषज्ञों का मानना है कि मनरेगा के तहत रोजगार की मांग सीधे तौर पर कृषि गतिविधियों, मानसून की स्थिति और ग्रामीण इलाकों में उपलब्ध वैकल्पिक रोजगार से जुड़ी होती है। खेती और बारिश के मौसम में कई मजदूर खेतों की ओर लौट जाते हैं, जिससे मनरेगा पर निर्भरता घट जाती है। वहीं, कृषि सीजन से पहले और बाद के समय में यह योजना ग्रामीण परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बन जाती है।

जिलों में असमान रुझान
जिलावार विश्लेषण से पता चलता है कि गढ़वा, गिरिडीह, पलामू, रांची और पूर्वी सिंहभूम जैसे जिलों में लगातार अधिक वर्क डिमांड दर्ज की गई। इसके उलट लोहरदगा, खूंटी और सिमडेगा में काम की मांग अपेक्षाकृत कम रही। जानकारों के अनुसार, जहां आबादी अधिक है और ग्रामीण आजीविका के विकल्प सीमित हैं, वहां मनरेगा की भूमिका आज भी अहम बनी हुई है।

पंचायत स्तर पर योजनाएं बढ़ाने की अपील
ग्रामीण संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से आग्रह किया है कि जिन महीनों में काम की मांग चरम पर रहती है, उस समय पंचायत स्तर पर अधिक योजनाएं स्वीकृत की जाएं। उनका कहना है कि इससे श्रमिकों को समय पर रोजगार मिलेगा और बेरोजगारी भत्ता देने जैसी स्थिति से भी बचा जा सकेगा।

माहवार मनरेगा वर्क डिमांड (परिवारों की संख्या)

  • अप्रैल: 10,96,266

  • मई: 13,11,548

  • जून: 12,11,888

  • जुलाई: 9,22,456

  • अगस्त: 7,56,299

  • सितंबर: 7,17,434

  • अक्टूबर: 6,24,642

  • नवंबर: 7,13,505

  • दिसंबर: 8,60,724

  • जनवरी: 5,94,815