पेसा नियमावली पर अधिसूचना में देरी से बढ़ी सियासी गर्मी, विपक्ष ने नियमावली सार्वजनिक करने की दी चुनौती

पेसा नियमावली पर अधिसूचना में देरी से बढ़ी सियासी गर्मी, विपक्ष ने नियमावली सार्वजनिक करने की दी चुनौती

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jan 01, 2026, 4:10:00 PM

कैबिनेट की स्वीकृति के बावजूद पेसा नियमावली को लेकर अब तक सरकारी अधिसूचना जारी नहीं होने से झारखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस मुद्दे पर विपक्ष लगातार सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहा है, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन बचाव की मुद्रा में नजर आ रहा है।

भाजपा सांसद और प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने इस देरी पर असंतोष जताते हुए मुख्यमंत्री से नियमावली को सार्वजनिक करने की खुली चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1996 में संसद द्वारा पारित पेसा कानून का उद्देश्य जनजातीय क्षेत्रों में स्वशासन को मजबूत करना था, जिसके आधार पर पंचायत चुनाव भी कराए गए। दीपक प्रकाश का आरोप है कि वर्तमान राज्य सरकार ने भले ही पेसा नियमावली को कैबिनेट से मंजूरी दे दी हो, लेकिन इसके प्रावधानों को जनता से छिपाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उनके मुताबिक, राज्यवासियों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि नियमावली में क्या प्रावधान किए गए हैं।

वहीं, विपक्ष के हमलों का जवाब देने के लिए सत्तारूढ़ जेएमएम-कांग्रेस-राजद गठबंधन भी सामने आ गया है। कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि कैबिनेट से पारित निर्णय अंततः सार्वजनिक होते ही हैं और भाजपा को इस विषय पर इतनी बेचैनी क्यों है, यह समझ से परे है। उन्होंने भाजपा पर भ्रम फैलाने और अनावश्यक अफवाहें गढ़ने का आरोप भी लगाया।

गौरतलब है कि 23 दिसंबर को हेमंत सोरेन की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने लंबी प्रक्रिया के बाद पेसा नियमावली को मंजूरी दी थी। इसके बाद से ही आदिवासी समाज और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि नियमावली में पारंपरिक धार्मिक और सामाजिक व्यवस्थाओं को कितना संरक्षण दिया गया है। जब तक इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक इसके वास्तविक स्वरूप को लेकर अटकलें बनी रहेंगी।

उल्लेखनीय है कि झारखंड राज्य गठन के बाद वर्ष 2001 में विधानसभा ने झारखंड पंचायती राज अधिनियम पारित किया था, जिसका उद्देश्य अनुसूचित और गैर-अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत व्यवस्था को सशक्त बनाना था। हालांकि, यह अधिनियम अब तक पूरी तरह लागू नहीं हो सका। पेसा को लागू करने की मांग समय-समय पर उठती रही है और इस संबंध में न्यायालय के निर्देश भी सामने आते रहे हैं। इसी क्रम में इस मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी को झारखंड हाईकोर्ट में प्रस्तावित है।