बंगाल की खाड़ी में बन रहे चक्रवाती परिसंचरण का झारखंड में असर, 5 मई तक कई जिलों में ओलावृष्टि की आशंका

बंगाल की खाड़ी में बन रहे चक्रवाती परिसंचरण का झारखंड में असर, 5 मई तक कई जिलों में ओलावृष्टि की आशंका

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Apr 30, 2026, 11:10:00 AM

झारखंड में 30 अप्रैल से मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि 5 मई तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश, तेज हवाएं और गरज-चमक की स्थिति बनी रह सकती है। बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और बांग्लादेश के आसपास बने चक्रवाती परिसंचरण के कारण यह मौसमी गतिविधियां तेज होंगी। विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आने वाले तीन दिनों में अधिकतम तापमान में लगभग 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे भीषण गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

मौसम विभाग ने 30 अप्रैल के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए कई जिलों में तेज आंधी और ओलावृष्टि की संभावना जताई है। हवा की गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। जिन जिलों में इसका अधिक प्रभाव देखने को मिल सकता है, उनमें रांची, हजारीबाग, चतरा, कोडरमा, गिरिडीह, धनबाद, बोकारो, देवघर, दुमका, गोड्डा, साहेबगंज और पाकुड़ शामिल हैं।

बारिश से तापमान में गिरावट, मौसम हुआ सुहावना
पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में हुई बारिश ने तापमान को नीचे लाने में मदद की है। कई जिलों में ओलावृष्टि भी दर्ज की गई, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार खूंटी में सबसे अधिक 34.5 मिमी वर्षा हुई, जबकि बेरमो में 30.5 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा कांके, हजारीबाग, बरही और नवाडीह में भी मध्यम स्तर की वर्षा हुई।

बारिश के साथ धनबाद और बोकारो क्षेत्रों में तेज हवाएं चलीं, जिनकी रफ्तार 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई। तेज हवा के कारण पेड़ों की डालियां टूटने और बिजली व्यवस्था बाधित होने की आशंका जताई गई है।

मौसम की इस गतिविधि के बीच बिजली गिरने की घटनाएं भी सामने आई हैं। गिरिडीह जिले के तिसरी क्षेत्र में दो युवकों की मौत हो गई, जबकि लोहरदगा के भंडरा इलाके में एक महिला की जान चली गई। इन घटनाओं के बाद स्थानीय स्तर पर शोक का माहौल है।

कृषि क्षेत्र को मिल सकता है लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि यह वर्षा प्री-मानसून प्रक्रिया का हिस्सा है, जो कृषि के लिए लाभकारी साबित हो सकती है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों की गहरी जुताई कर मिट्टी को खुला रखें, ताकि वर्षा का पानी अधिक मात्रा में जमीन के अंदर समा सके और भूजल स्तर में सुधार हो। मौसम विशेषज्ञों ने यह भी संकेत दिया है कि इस वर्ष अलनीनो के प्रभाव के कारण मानसून के दौरान सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। ऐसे में अभी से जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन पर ध्यान देना जरूरी होगा।

विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों से दूर रहें, पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें और सुरक्षा उपायों का पालन करें, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।