कृषि विभाग में बढ़ती अनियमितताओं पर CPI का हमला, ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को संरक्षण देने का आरोप

कृषि विभाग में बढ़ती अनियमितताओं पर CPI का हमला, ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को संरक्षण देने का आरोप

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Dec 09, 2025, 4:40:00 PM

झारखंड के कृषि विभाग में अफसरशाही, अनियमितताओं और संदिग्ध कंपनियों की गतिविधियों पर CPI ने गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। पार्टी के राज्य कार्यालय सचिव अजय सिंह ने कहा कि विभाग में किसान हितों की उपेक्षा कर अधिकारियों और ब्लैकलिस्टेड कंपनियों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।

उन्होंने बताया कि PDMC योजना के तहत किए गए कामों की गुणवत्ता पर उठे सवालों के बाद कृषि निदेशक ने 19 जनवरी 2024 को 18 कंपनियों की सामग्री की रैंडम जांच कराने का आदेश दिया था। CIPET द्वारा 27 फरवरी 2025 को सौंपी गई रिपोर्ट में चार कंपनियों—

  1. R M Drip & Sprinkle System Ltd

  2. Bharat Drip Irrigation & Agro

  3. Unnati Agriculture Pvt. Ltd

  4. Dev Polymers
    —के उत्पाद मानकों के विपरीत पाए गए।

निदेशक ने निर्देश दिया था कि इन कंपनियों द्वारा अन्य जिलों में सप्लाई की गई सामग्री की भी जांच की जाए और जांच पूरी होने तक इन्हें नए कार्यादेश न दिए जाएं। लेकिन अजय सिंह का आरोप है कि अधिकारियों की ढिलाई के कारण न तो जांच आगे बढ़ी और न ही दोषियों पर किसी प्रकार की कार्रवाई की गई। उल्टा इन्हीं कंपनियों को पहले से ज्यादा काम सौंप दिया गया है, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला है।

उन्होंने यह भी बताया कि हजारीबाग के इचाक प्रखंड में की गई समीक्षा में 12 लाभुकों में से 11 फर्जी पाए गए। रिकॉर्ड में उनके नाम ग्राम भुसाई के बताए गए थे, जबकि वे वास्तव में टेपसा के निवासी निकले।

अजय सिंह ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की है कि PDMC योजना पर श्वेत पत्र जारी किया जाए, CIPET की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और दोषी अधिकारियों तथा कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि अफसर और कंपनियों की मिलीभगत सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा रही है और इसे रोकने के लिए कठोर कदम अनिवार्य हैं।