कृषि विभाग में बढ़ते भ्रष्टाचार पर CPI का वार, अधिकारियों पर मिलीभगत का लगाया आरोप

कृषि विभाग में बढ़ते भ्रष्टाचार पर CPI का वार, अधिकारियों पर मिलीभगत का लगाया आरोप

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Dec 06, 2025, 5:27:00 PM

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के राज्य कार्यकारिणी सदस्य एवं जिला सचिव अजय सिंह ने एक प्रेस वार्ता आयोजित कर झारखंड के कृषि विभाग में फैले भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राज्य से भ्रष्टाचार मिटाने का दावा करते हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी उनके प्रयासों को कमजोर कर अपनी मनमानी कर रहे हैं।

अजय सिंह ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री राज्य विकास के लिए लगातार प्रयासरत हैं, परंतु कुछ अधिकारियों की सांठगांठ के चलते सरकार भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में असफल साबित हो रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में कृषि विभाग ने कई कंपनियों को किसानों को घटिया एवं मानकविहीन उपकरण उपलब्ध कराने के आरोप में ब्लैकलिस्ट किया था।

सूक्ष्म सिंचाई में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक उत्पादों की जांच के लिए सरकार ने CIPET (सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी) को जिम्मेदारी दी थी। रैंडम जांच में इन कंपनियों के उत्पाद नॉन-स्टैंडर्ड पाए गए, जिसके बाद उन्हें पाँच वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर बैंक गारंटी और भुगतान रोक दिए गए थे।

लेकिन, अजय सिंह के अनुसार, मात्र आठ दिनों के भीतर ही बिना किसी नई जांच के इन्हीं कंपनियों को फिर से सूची से बाहर कर ठेके दे दिए गए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की मिलीभगत से ये कंपनियाँ अब भी कृषि विभाग में सक्रिय हैं और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही हैं।

CIPET की रिपोर्ट में जिन कंपनियों के उत्पाद फेल पाए गए थे, उनमें शामिल हैं—

  1. Mohit India

  2. Makk Now Industries

  3. Global E Mechanical Equipment

  4. Premier Irrigation

  5. Adritec Pvt. Ltd.

  6. Nimbus Pipes Ltd.

  7. Mohit Polytech Pvt. Ltd.

  8. Vedanta Polymers Pvt. Ltd.

  9. Rungta Irrigation Ltd.

  10. Shree Bhandari Plastic Pvt. Ltd.

  11. Bharat Drop Irrigation and Agro

  12. RM Drip and Sprinklers System Ltd.

  13. Samay Irrigation Pvt. Ltd.

उन्होंने कहा कि इन कंपनियों को सजा देने के बजाय, अधिकारी इन्हें संरक्षण दे रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप आज राज्य के कृषि विभाग के लगभग 60% कार्यादेश इन्हीं कंपनियों के पास हैं।

CPI ने राज्य सरकार से मांग की है कि भ्रष्टाचार में शामिल अधिकारियों और किसानों के साथ धोखा करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अधिकारी योजनाओं के सही क्रियान्वयन पर ध्यान दें, न कि कंपनियों के हित साधने में लगे रहें।