झारखंड में माओवादी नेटवर्क पर लगातार प्रहार, इनामी नक्सलियों की गिरफ्तारी और सरेंडर से कमजोर हुआ संगठन

झारखंड में माओवादी नेटवर्क पर लगातार प्रहार, इनामी नक्सलियों की गिरफ्तारी और सरेंडर से कमजोर हुआ संगठन

झारखंड में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे लगातार अभियानों का असर अब माओवादी संगठन पर साफ दिखाई देने लगा है। हाल के दिनों में हुई गिरफ्तारियों और आत्मसमर्पण की घटनाओं ने राज्य में सक्रिय नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका दिया है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और झारखंड पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 15 लाख रुपये के इनामी मदन महतो, 5 लाख रुपये के इनामी रवि सरदार तथा 2 लाख रुपये की इनामी मीना, जो मदन महतो की पत्नी है, को गिरफ्तार किया गया है।

इस कार्रवाई से पहले जुलाई के अंतिम सप्ताह में सुरक्षा एजेंसियों ने माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व पर भी बड़ी सफलता हासिल की थी। अभियान के दौरान संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य और कुख्यात नक्सली नेता मिसिर बेसरा को चार अन्य साथियों के साथ गिरफ्तार किया गया था। मिसिर बेसरा पर सरकार ने एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था और वह लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की सूची में सबसे वांछित नक्सलियों में शामिल था।

इसी क्रम में 29 जुलाई को पुलिस मुख्यालय में चलाए जा रहे 'नवजीवन-2' अभियान के तहत भाकपा (माओवादी) से जुड़े 16 नक्सलियों ने हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पण करने वालों में 11 पुरुष और 5 महिलाएं शामिल थीं।

सरेंडर करने वालों में संतोष उर्फ बासुदेव दा उर्फ गांधी उर्फ दिलीप उर्फ संजय महतो उर्फ बासुकू उर्फ श्याम भी शामिल था। गिरिडीह और चाईबासा क्षेत्र में एक समय उसका व्यापक प्रभाव माना जाता था। उस पर राज्य सरकार ने 15 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।

हालिया गिरफ्तारियों और आत्मसमर्पण की इन घटनाओं को राज्य में नक्सल विरोधी अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां लगातार अभियान चलाकर माओवादी संगठन के शेष नेटवर्क को भी समाप्त करने की दिशा में कार्रवाई जारी रखे हुए हैं।