झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी की हालिया टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि “बिचौलिया खत्म करने” जैसे दावे वास्तविकता से मेल नहीं खाते। उनके अनुसार, ऐसी बातें सिर्फ भाषणों और प्रचार तक सीमित रह जाती हैं, जबकि आम लोगों को आज भी सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। दूबे ने आरोप लगाया कि यदि वास्तव में व्यवस्था पारदर्शी और प्रभावी होती, तो गरीब तबके को राशन, पेंशन और अन्य सरकारी सुविधाओं के लिए अब भी सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से भाजपा शासित राज्यों में योजनाओं के क्रियान्वयन में खामियां साफ नजर आती हैं। केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि राज्यों को मिलने वाले संसाधनों में कमी आई है, जिसका सीधा असर कल्याणकारी योजनाओं के संचालन पर पड़ रहा है। उनके मुताबिक, इस वजह से जरूरतमंदों तक योजनाओं का लाभ सुचारू रूप से पहुंचाने में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। दूबे ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए नारों और प्रचार का सहारा ले रही है। उन्होंने बेरोजगारी और महंगाई को गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि यदि शासन व्यवस्था ईमानदारी से काम कर रही होती, तो ये समस्याएं इस स्तर तक नहीं पहुंचतीं। उनके अनुसार, आज भी समाज का गरीब वर्ग अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। झारखंड की वर्तमान सरकार का बचाव करते हुए उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार जनकल्याण की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है और योजनाओं को पारदर्शी तरीके से लागू करने का प्रयास कर रही है। हालांकि, उन्होंने केंद्र पर राज्य के प्रति उपेक्षा और भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया, जिससे विकास कार्यों में बाधाएं आ रही हैं। अंत में, दूबे ने भाजपा नेताओं को सलाह दी कि वे केवल बयानबाजी करने के बजाय वास्तविक परिस्थितियों को समझें। उन्होंने जोर देकर कहा कि गरीबों के अधिकारों की रक्षा तभी संभव है, जब सरकार की नीयत स्पष्ट हो और नीतियां मजबूत हों, न कि केवल आकर्षक नारों के सहारे।