ED-पुलिस विवाद पर कांग्रेस का पलटवार, आलोक दूबे बोले-कानून से ऊपर कोई नहीं

ED-पुलिस विवाद पर कांग्रेस का पलटवार, आलोक दूबे बोले-कानून से ऊपर कोई नहीं

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jan 15, 2026, 5:05:00 PM

ईडी कार्यालय से जुड़े हालिया घटनाक्रम को लेकर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था या व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने की छूट नहीं दी जा सकती और यदि कोई संवैधानिक सीमाओं से बाहर जाता है, तो उस पर कार्रवाई करना राज्य पुलिस का अधिकार और दायित्व दोनों है।

आलोक दूबे ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के बयानों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उनके वक्तव्य डर पैदा करने वाले, तथ्यहीन और राजनीतिक हताशा से उपजे हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी के खिलाफ चल रही विधि-सम्मत प्रक्रिया से भाजपा असहज है, जिसकी झलक उसके नेताओं की बयानबाज़ी में दिख रही है।

पुलिस की कार्रवाई को बताया संवैधानिक कर्तव्य

कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि यदि रांची पुलिस ने ईडी कार्यालय में पूछताछ की है, तो यह पूरी तरह संवैधानिक दायरे में किया गया कदम है। उनका कहना था कि अगर किसी जांच एजेंसी द्वारा कानून के प्रावधानों का उल्लंघन होता है, तो पुलिस को यह अधिकार है कि वह नियमों के अनुसार पूछताछ करे।

उन्होंने कहा कि बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के जांच एजेंसियों और राज्य प्रशासन के खिलाफ शंकाएं फैलाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। ऐसे आरोप न सिर्फ संस्थाओं के बीच अविश्वास बढ़ाते हैं, बल्कि कानून व्यवस्था को भी कमजोर करते हैं।

भाजपा पर संवैधानिक संस्थाओं को राजनीति में घसीटने का आरोप

आलोक दूबे ने सवाल उठाया कि जब ईडी या भारत निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगते हैं, तो भाजपा को असहजता क्यों होती है। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था को राजनीतिक हथियार बनाना या दबाव में लेने की कोशिश स्वीकार्य नहीं है। कांग्रेस का रुख साफ है कि झारखंड में कानून का शासन हर हाल में कायम रहेगा और कोई भी संगठन या व्यक्ति इससे ऊपर नहीं हो सकता।

सरकार ने जांच में दखल नहीं दिया: दूबे

कांग्रेस महासचिव ने दोहराया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार ने कभी भी किसी संवैधानिक संस्था या जांच एजेंसी के काम में हस्तक्षेप नहीं किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को किसी भी एजेंसी की निष्पक्ष जांच से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन बिना सबूत “साक्ष्य नष्ट करने” जैसे आरोप गढ़ना जानबूझकर टकराव पैदा करने की कोशिश है।

सोशल मीडिया पर डर फैलाने का आरोप

आलोक दूबे ने यह भी कहा कि यदि किसी एजेंसी को सुरक्षा से जुड़ी वास्तविक चिंता है, तो उसके समाधान के लिए प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाएं पहले से मौजूद हैं। सोशल मीडिया के जरिए भय और अविश्वास का माहौल बनाना किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य पुलिस न तो किसी साक्ष्य से छेड़छाड़ करती है और न ही ऐसा होने देगी।

जनता को दिया संदेश

अपने बयान के अंत में आलोक कुमार दूबे ने कहा कि झारखंड की जनता अपने जनादेश का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगी। राज्य को बदनाम करने या डराने की राजनीति को लोग भली-भांति समझते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि झारखंड लोकतांत्रिक मूल्यों से चलेगा, न कि अफवाहों और धमकियों से।