झारखंड राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन को लेकर पिछले दो दिनों से चल रही अनिश्चितता अब समाप्त होती दिखाई दे रही है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, रिटर्निंग ऑफिसर ने प्रस्तुत दस्तावेजों और कानूनी पहलुओं की विस्तृत जांच के बाद उनके नामांकन को स्वीकार कर लिया है। हालांकि निर्वाचन प्रक्रिया के तहत इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है।
राज्यसभा चुनाव के दौरान नाथवानी के नामांकन पर उठी आपत्तियों ने राजनीतिक हलकों में व्यापक चर्चा को जन्म दिया था। कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की ओर से यह सवाल उठाया गया था कि विभिन्न दस्तावेजों में उम्मीदवार के नाम का उल्लेख अलग-अलग स्वरूप में किया गया है। इसी आधार पर नामांकन पत्र की वैधता पर आपत्ति दर्ज कराई गई थी।
विवाद का केंद्र उम्मीदवार के नाम की लिखावट थी। कुछ अभिलेखों में नाम “परिमल नाथवानी” दर्ज था, जबकि अन्य दस्तावेजों में “नाथवानी परिमल” लिखा गया था। आपत्ति मिलने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने तत्काल फैसला लेने के बजाय मामले को जांच के लिए लंबित रखा और सभी संबंधित रिकॉर्ड का परीक्षण शुरू किया।
नामांकन विवाद ने जल्द ही राजनीतिक रंग ले लिया। कांग्रेस नेताओं ने विधानसभा परिसर में प्रदर्शन करते हुए नामांकन निरस्त करने की मांग उठाई। दूसरी ओर, भाजपा समर्थित नेताओं ने इसे केवल तकनीकी प्रकृति की त्रुटि बताते हुए नामांकन को वैध ठहराने की पैरवी की। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप भी देखने को मिले।
विवाद गहराने के बाद परिमल नाथवानी विधानसभा सचिवालय पहुंचे और अधिकारियों के समक्ष अपनी स्थिति स्पष्ट की। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने भी विधानसभा पहुंचकर पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की। सूत्रों का कहना है कि कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर सभी पहलुओं की जांच के बाद नामांकन को स्वीकार करने का निर्णय लिया गया।
झारखंड से राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव होना है। नामांकन को मंजूरी मिलने की स्थिति में चुनावी मैदान में तीन प्रमुख चेहरे होंगे; झामुमो के बैद्यनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी।
नाथवानी के चुनावी दौड़ में बने रहने से राज्यसभा चुनाव का समीकरण और अधिक रोचक हो गया है। विभिन्न दल अब विधायकों का समर्थन सुनिश्चित करने के लिए अपनी राजनीतिक रणनीति को धार देने में जुट गए हैं। हालांकि नामांकन को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं, लेकिन निर्वाचन अधिकारियों की ओर से औपचारिक घोषणा अभी बाकी है। अंतिम निर्णय सार्वजनिक होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी और चुनावी तस्वीर पर से शेष संशय भी दूर हो जाएगा।