मनरेगा पर केंद्र के फैसलों के खिलाफ कांग्रेस का राज्यव्यापी संघर्ष, आंदोलन की घोषणा

मनरेगा पर केंद्र के फैसलों के खिलाफ कांग्रेस का राज्यव्यापी संघर्ष, आंदोलन की घोषणा

रांची के कांग्रेस भवन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश की अध्यक्षता में बोर्ड-निगम प्रतिनिधियों, अग्रणी मोर्चा संगठनों और विभागीय अध्यक्षों की एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के सदस्य और मनरेगा के प्रारूप निर्माण से जुड़े अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज की मौजूदगी ने चर्चा को खास अहमियत दी।

बैठक का केंद्र बिंदु केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा को कमजोर किए जाने के कथित प्रयासों के खिलाफ राजनीतिक और जन आंदोलन की रूपरेखा तय करना रहा। इस दौरान तय किया गया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई लड़ेगी। रणनीति के तहत 3 जनवरी 2026 को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में पत्रकार वार्ताएं आयोजित की जाएंगी। इसके बाद 5 जनवरी को रांची के मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से पदयात्रा निकाली जाएगी, जो लोक भवन पहुंचकर एक विशाल जनसभा के रूप में संपन्न होगी।

प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि संविधान से उपजा काम का अधिकार है। उन्होंने दो टूक कहा कि कांग्रेस ग्रामीण श्रमिकों के रोजगार, गरिमा, मजदूरी और समय पर भुगतान की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी। महात्मा गांधी के नाम को योजना से अलग करने और मजदूरों के अधिकार को दया या खैरात के रूप में पेश करने की किसी भी कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा।

उन्होंने केंद्र सरकार की नई वित्तीय व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले मनरेगा के खर्च में केंद्र की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत थी, जिसे घटाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि राज्यों का बोझ 10 से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया। इससे राज्य सरकारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा और विकास कार्य बाधित होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जहां बड़े कॉरपोरेट घरानों के कर्ज माफ करती है, वहीं गरीबों को रोजगार देने वाली योजना को समाप्त करने की दिशा में कदम उठा रही है।

इस अवसर पर ज्यां द्रेज ने कहा कि मनरेगा को कमजोर करना देश के संघीय ढांचे पर सीधा प्रहार है। उनके मुताबिक राज्यों से संसाधन छीने जा रहे हैं और सत्ता व वित्तीय अधिकारों का अत्यधिक केंद्रीकरण किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि मनरेगा से जुड़े अहम फैसले सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से लिए गए, जिन पर न तो मंत्रिमंडल में चर्चा हुई और न ही संबंधित मंत्री से कोई संवाद किया गया।

बैठक के अंत में मौजूद वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों ने मनरेगा के समर्थन में आंदोलन को तेज करने का संकल्प लिया और इसे गरीबों, मजदूरों तथा ग्रामीण समाज के अधिकारों की लड़ाई करार दिया।