राजधानी रांची में बुधवार को कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू की अध्यक्षता में पार्टी की एक अहम बैठक आयोजित हुई। बैठक का मुख्य एजेंडा राज्य सरकार द्वारा लागू की गई पेसा (पंचायत एक्सटेंशन टू शेड्यूल्ड एरिया) नियमावली रहा। इस दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और लोहरदगा विधायक रामेश्वर उरांव ने नियमावली को लेकर खुलकर आपत्ति जताई और पार्टी तथा सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।
बैठक में पेसा पर चर्चा के दौरान रामेश्वर उरांव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे किसी राजनीतिक दबाव या बंधन में नहीं हैं और समाज के हितों के साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान पेसा नियमावली में परंपरागत कानून (कस्टमरी लॉ) की अनदेखी की गई है, जो इस कानून की आत्मा के खिलाफ है। उनका कहना था कि यदि पेसा कानून में खामियों को लेकर मामला अदालत तक जाता है, तो वे समुदाय के साथ खड़े होंगे, न कि पार्टी लाइन के साथ।
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर नियमावली को कानून की मूल भावना के अनुरूप संशोधित नहीं किया गया, तो इसका राजनीतिक नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ सकता है। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि छत्तीसगढ़ में पेसा लागू होने के बाद वहां की कांग्रेस को 2023 के विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा था। बताया गया कि वहां भी नियमावली तैयार करने में हुई गलतियों के कारण आदिवासी मतदाता कांग्रेस से दूर हो गए। उल्लेखनीय है कि इससे पहले के चुनाव में कांग्रेस को 29 में से 26 सीटें मिली थीं, जो बाद में बढ़कर 27 हो गई थीं।
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में रामेश्वर उरांव ने कहा कि पेसा कानून लागू होना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन नियमों के स्तर पर गंभीर चूक हुई है। उन्होंने बताया कि पेसा की बुनियाद तीन स्तंभों पर टिकी है—कस्टमरी लॉ, सामाजिक व धार्मिक परंपराओं का संरक्षण और भूमि व संसाधनों से जुड़ी परंपराएं। उनके अनुसार, वर्तमान नियमावली में केवल तीसरे बिंदु पर आंशिक चर्चा है, जबकि पहले दो पहलुओं की पूरी तरह अनदेखी की गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका उद्देश्य विरोध नहीं, बल्कि सुधार है और उन्हें उम्मीद है कि पार्टी नेतृत्व इस दिशा में कदम उठाएगा।
वहीं, इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव कमलेश महतो ने कहा कि पेसा नियमावली को लेकर जो भ्रम फैलाया जा रहा है, उसके खिलाफ लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि अगले एक महीने के भीतर झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इसके लिए सभी बूथ लेवल एजेंटों (BLA) की नियुक्ति कर उनकी पावती रसीद प्रदेश कांग्रेस के कनेक्ट सेंटर में जमा कराई जाएगी। इसके साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं को मनरेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने का निर्देश दिया गया है।